सतत विकास लक्ष्यों में मातृत्व मृत्यु दर को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने की बात कही गयी है। मातृत्व मृत्यु दर की भारत में क्या स्थिति है? मातृत्व मृत्यु दर के मामले में सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत को किन कदमों को उठाने की आवश्यकता है?

मातृत्व मृत्यु दर से तात्पर्य प्रति एक लाख जीवित  जन्मों पर होने वाली माताओं की मृत्यु से है। वर्ष 2015 में स्वीकृत सतत विकास लक्ष्यों में मातृत्व मृत्यु दर को तीसरे लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया है। ज्ञातव्य है कि कुल 17 सतत विकास लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं।

सतत विकास लक्ष्यों के तहत वर्ष 2030 तक मातृत्व मृत्यु दर को 70 से कम लाने का लक्ष्य का निर्धारित किया गया है। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2000 ये 2015 तक लागू सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों के तहत मात्रृत्व मृत्यु दर को नियंत्रित करने में अधिक सफलता नहीं मिली थी। वैश्विक स्तर पर वर्ष 2015 में मातृत्व मृत्यु दर 216 थी।

मातृत्व मृत्यु दर के मामले में भारत की स्थितिः

  • मातृत्व मृत्यु दर के मामले में भारत की स्थिति काफी कमजोर है। वर्तमान में यह 167 है अर्थात प्रति एक लाख जीवित जन्मों में 167 माताओं की मृत्यु होती है।
  • सरकारी अस्पतालों में समुचित आधारभूत ढाँचे की कमी इस स्थिमि के लिए उत्तरदायी है। साथ ही प्रशिक्षित एवं कुशल डॉक्टरों एवं नर्सों का भी अभाव है।
  • अस्पतालों में निम्न जाति एवं गरीब वर्ग की महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है तथा उन्हें समुचित सुविधायें नहीं उपलब्ध करायी जाती हैं। इसके चलते वे घर में ही प्रसव को प्राथमिकता देती हैं।
  • बाल विवाह अभी भी कई हिस्सों में जारी है जिसके  कारण कम उम्र में माँ बनने वाली बच्चियाँ अक्सर संकट का सामना करती हैं।
  • सामाजिक कारक भी इसमें अहम भूमिका अदा करता है। पितृसत्तावादी समाज में महिलाओं के स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता है। साथ ही प्रचलित मान्यताओं के अनुसार घर में ही प्रसव को उचित माना जाता है। मातृत्व मृत्यु दर के लिए ये कारक अहम हैं।

मातृत्व मृत्यु दर के सम्बंध में सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत के द्वारा उठाये जाने वाले आवश्क कदमः

  • लोगों को जागरूक बनाकर संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना होगा ताकि अधिकांश महिलायें सरकारी अस्पतालों में ही प्रसव को प्राथमिकता प्रदान करें।
  • समुचित आधारभूत ढाँचे की स्थापना तथा प्रशिक्षित डॉक्टरों एवं संवेदनशील स्टॉफ की नियुक्ति।
  • स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजटीय आवंटन को बढ़ाना ताकि सुविधाओं के लिए वित्तीय कमी का सामना न करना पड़े।
  • प्रसव कराने वाली माताओं को मौद्रिक सहयोग के साथ-साथ मेडिकल सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
  • युवा बालिकाओं को अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के सम्बंध में शिक्षित किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भारतें मातृत्व मृत्यु दर की स्थिति काफी कमजोर है। इस स्थिति में सुधार लाने के लिए उपर्युक्त उपायों को अपनाना होगा। इन उपायों पर अमल करके ही सतत विकास लक्ष्य के तहत निर्धारित मातृत्व मृत्यु दर के लक्ष्य को पाया जा सकता है।

Posted on by