राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के हालिया आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि देश में दलितों के साथ होने वाले अत्याचारों में वृद्धि हुयी है। दलितों के विरूद्ध होने वाले अपराधों में वृद्धि के पीछे प्रमुख कारण क्या है? दलित अपराधों पर नियंत्रण के लिए कौन से कदम उठाये जाने चाहिए?

हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के द्वारा आँकडे़ प्रस्तुत किये गये जिनसे पता चलता है कि देश में दलितों के विरूद्ध होने वाले अपराधों में काफी वृद्धि हुयी है। इन आँकड़ों के अनुसार पुलिस में रजिस्टर्ड मामलों से ज्ञात होता है कि दलितों के विरूद्ध सर्वाधिक अत्याचार उत्तर प्रदेश में हुए।

अर्थात् कुल अपराधों का तकरीबन 25.6 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में घटित हुआ। इस मामले में 14 प्रतिशत के साथ बिहार दूसरे स्थान पर तथा 12.6 प्रतिशत के साथ राजस्थान तीसरे स्थान पर रहा। इसी प्रकार 19 मेट्रोपोलिटन शहरों में लखनऊ में सर्वाधिक दलित अत्याचार से सम्बंधित मामले दर्ज किये गये। लखनऊ में कुल 262 अपराध दर्ज किये गये।

दलितों के विरूद्ध होने वाले अपराधों के पीछे उत्तरदायी प्रमुख कारणः

  • दलितों का बड़ा हिस्सा अभी भी असंगठित क्षेत्र से रोजगार प्राप्त करता है तथा खेतिहर मजदूर की भूमिका निभाता है। इस कमजोर स्थिति के कारण उच्च जाति के लोगों के द्वारा उनका शोषण किया जाता है।
  • दलितों में शिक्षा का प्रसार हो रहा है तथा वे आरक्षण का लाभ लेकर सरकारी नौकरियों तक पहुँच बना रहे हैं। इससे उच्च जाति के लोगों के मन में उनके प्रति ईर्ष्या उत्पन्न हो रही है। यह ईर्ष्या उन्हें अपराध की ओर ले जाती है।
  • दलित वोट बैंक के कारण राजनीतिक दलों के द्वारा  इनका ध्रुवीकरण किया जाता है। यह राजनीतिक ध्रुवीकरण समाज में हिंसा को बढ़ावा देता है।
  • शिक्षा के प्रसार आदि के कारण दलित अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं तथा अपने विरूद्ध होने वाले अपराधों की शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। इसके कारण भी दलितों के विरूद्ध होने वाले अपराधों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में दलितों के विरूद्ध होने वाले अपराधों को दबा देने की परम्परा अभी भी जारी है। उच्च वर्ग के शक्तिशाली व्यक्ति के विरूद्ध आज भी शिकायत दर्ज कराना कठिन है।

दलितों के विरूद्धी होने वाले अपराधों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदमः

  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार रोकथाम अधिनियम को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
  • लोगों को संविधान के द्वारा प्रदत्त स्वतंत्रता एवं समानता के अधिकारों के सम्बंध में जागरूक किया जाना चाहिए।
  • सरकार के द्वारा ऐसी सामाजिक-आर्थिक नीतियों को लागू किया जाना चाहिए जिससे उच्च वर्ग एवं निम्न वर्ग के बीच गैप को भरा जा सके।
  • वोट बैंक की राजनीति एवं फूट डालो राज करो की राजनीति पर सख्त नियंत्रण होना चाहिए।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि स्वतंत्रता के 70 वर्षों के बाद भी देश में दलितों के विरूद्ध होने वाले अपराध जारी है। इनकी पुष्टि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़ों से होती है। उपर्युक्त उल्लिखित उपायों पर अमल करके इन पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।

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