इलेक्टोरल बाँड के विषय में आप क्या जानते हैं? राजजीतिक दलों को दिए जाने वाले चंदों में पारदर्शिता लाने में इलेक्टोरल बाँड किस प्रकार से मददगार होंगे? इनसे सम्बंधित चुनौतियों का उल्लेख कीजिए। साथ ही बताइए कि राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता के लिए किस प्रकार के कदम उठाये जाने की जरुरत है?

इलेक्टोरल बाँड की घोषणा 2017-18 के केन्द्रीय बजट के दौरान की गयी थी। हाल ही में केन्द्र सरकार के द्वारा इलेक्टोरल बाँड के सम्बंध में विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। यदि इलेक्टोरल बाँड को लाया जाता है तो भारत दुनिया का प्रथम ऐसा देश होगा जहाँ इलेक्टोरल बाँड का प्रयोग किया जायेगा।

वस्तुतः इलेक्टोरल बाँड एक धारक बाँड (Bearer Bond) होंगे जिन्हे भारतीय स्टेट बैंक की किसी भी शाखा से खरीदा जा सकेगा। इन बाँड को भारत का कोई भी नागरिक अथवा भारत में संचालित कोई भी निकाय खरीद सकेगा। इलेक्टोरल बाँड की वैद्यता मात्र 15 दिनों की होगी। इसी अवधि के भीतर सम्बंधित राजनीतिक दलों को इनका प्रयोग कर लेना होगा। जो राजनीतिक दल पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल मतों का 1 प्रतिशत प्राप्त कर लेंगे। वे ही इलेक्टोरल बाँड के दायरे में आऐगे।

राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले चंदों में पारदर्शिता लाने में इलेक्टोरल बाँड की भूमिकाः

  • एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स नामक संगठन के अनुसार अधिकांश राजनीतिक दल अज्ञात स्रोतों से चंदा प्राप्त करते हैं। राजनीतिक दलों का तकरीबन 70 प्रतिशत चंदा अज्ञात स्रोतों से आता है। इलेक्टोरल बाँड के आने से चंदों में पारदर्शिता आ जायेगी क्योंकि जो भी व्यक्ति या कम्पनी इलेक्टोरल बाँड खरीदेगा उसे सारी जानकारी प्रदान करनी होगी।
  • इलेक्टोरल बाँड के सम्बंध में राजनीतिक दलों को समुचित एवं व्यवस्थित आँकड़ा रखना होगा तथा उन्हे नियमित रुप से टैक्स रिटर्न दाखिल करना होगा। इससे पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी।

इलेक्टोरल बाँड के सम्बंध में प्रमुख चुनौतियाँ:

  • कोई ऐसा प्राधिकरण नहीं है जो दिए जाने वाले चंदे की लगातार निगरानी कर सके।
  • राजनीतिक दलों को अभी भी 2000रु० तक का चंदा नकद में लेने की छूट होगी जिससे इलेक्टोरल बाँड को लाये जाने का बहुत अधिक लाभ नहीं होगा क्योंकि राजनीतिक दल बड़ी रकम को 2000रु० के कई चंदों के रुप में प्राप्त कर सकते हैं।
  • इलेक्टोरल बाँड को लाने का तब तक कोई विशेष लाभ नहीं होगा। जब तक राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में नहीं ला दिया जाता।
  • इलेक्टोरल बाँड को खरीदने वाले एवं प्राप्त करने वाले दोनों को सारी जानकारी बैंक को प्रदान करनी होगी। इस जानकारी का दुरुपयोग सत्तारुढ़ दल के द्वारा किया जा सकता है।

राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता के लिए उठाये जाने वाले आवश्यक कदमः

  • एक राष्ट्रीय इलेक्टोरल फंड निर्मित किया जाना चाहिए जिसमें सभी दाताओं को दान देने की छूट होनी चाहिए। इस फंड में एकत्रित धन को राजनीतिक दलों में उनके द्वारा प्राप्त मतों के अनुपात में वितरित कर दिया जाना चाहिए।
  • इससे न सिर्फ दाताओं की पहचान गुप्त रहेगी बल्कि राजनीतिक फंडिंग में काले धन के प्रवेश को भी रोका जा सकेगा।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने के सम्बंध में इलेक्टोरल बाँड के स्थान पर राष्ट्रीय इलेक्टोरल फंड का निर्माण किया जाना चाहिए। इससे पारदर्शिता आयेगी तथा काले धन को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

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