हाल ही में देश की प्राथमिक शिक्षा के सम्बंध में एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट जारी की गयी है। इस रिपोर्ट से देश में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति पर क्या प्रकाश पड़ता है? प्राथमिक शिक्षा की स्थिति में सुधार के लिए किस प्रकार के प्रयासों की आवश्यकता है?

हाल ही में प्रथम नामक गैर सरकारी संगठन के द्वारा एएसईआर (Annual status of Education Report) नामक नवीनतम सर्वेक्षण जारी किया गया है। इस सर्वेक्षण के अनुसार स्कूलों में पढ़ने वाले तकरीबन एक-चौथाई बच्चे अपनी मात्तृभाषा को ठीक से पढ़ने एवं समझने में सक्षम हैं।

एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट - 2017 में देश के 24 राज्यों के 28 जिलों के आँकड़े शामिल किये गये हैं। ग्रामीण क्षेत्र के 21 प्रतिशत बच्चों को यह भी नहीं पता है कि उनके राज्य का नाम क्या है। देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम ने भी इस स्थिति के प्रति चिंता व्यक्त की है।

एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट के अनुसार देश में शिक्षा की स्थितिः

  • इस सर्वेक्षण में 14-18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को शामिल किया गया। सर्वेक्षण के दौरान 24 राज्यों के 28 जिलों मे कुल 1641 गाँवों को शामिल किया गया।
  • सर्वेक्षण से पता चला कि 57 प्रतिशत बच्चे साधारण गुणा-भाग करने में अक्षम हैं तथा 44 प्रतिशत बच्चों को नाप-तौल के विषय में कोई जानकारी नहीं है।
  • 21 प्रतिशत बच्चों को अपने राज्य के बारे में कोई जानकारी नहीं है तथा 36 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिन्हे देश की राजधानी के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
  • 44 प्रतिशत बच्चे (14-18 आयुवर्ग) ऐसे हैं जिनकी माँ कभी स्कूल नहीं गयी और 25 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनके पिता कभी स्कूल नहीं गये।
  • वर्ष 2004-05 में कक्षा आठ में दाखिला लेने वाले बच्चों की संख्या 1.1 करोड़ थी जो 2014-15 में बढ़कर 2.2 करोड़ हो गयी। किंतु इन बच्चों की बुनियादी समझ काफी कमजोर है।

प्राथमिक शिक्षा की स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदमः

  • समुचित आधारभूत ढाँचे का निर्माण किया जाना चाहिए तथा योग्य अध्यापकों की नियुक्ति की जानी चाहिए।
  • प्रदर्शन आधारित वेतन प्रणाली को लागू किया जाना चाहिए ताकि अयोग्य अध्यापकों को एक सबक मिल सके और वे गंभीरतापूर्वक शिक्षण का कार्य करें।
  • निजी स्कूलों मे निजी प्रकाशकों की पुस्तकों पर रोंक लगायी जानी चाहिए तथा राष्ट्रीय स्तर पर एक ही पाठ्यक्रम को लागू किया जाना चाहिए।
  • शिक्षण कार्य को मनोरंजक बनाया जाना चाहिए तथा ऑडियो-वीडियो विधियों से भी बच्चों को शिक्षित किया जाना चाहिए।
  • प्रत्येक जिले में एक मॉनीटरिंग समिति का गठन किया जाना चाहिए जिससे कि प्रत्येक स्कूल का समय-समय पर निरीक्षण किया जा सके और शिक्षण कि स्तर की जानकारी प्राप्त की जा सके।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में शिक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है। इस स्थिति में सुधार के लिए उपर्युक्त सुझावों को शीघ्रतिशीघ्र लागू किये जाने की जरुरत है।

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