भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र किस प्रकार की समस्याओं का सामना कर रहा है? हाल ही में लोकसभा में प्रस्तुत किया गया नेशनल मेडिकल कमीशन विधेयक 2017 देश में मेडिकल गवर्नेस की स्थिति में सुधार लाने में किस प्रकार से सहायक होग? साथ ही बताइए कि नेशनल मेडिकल कमीशन विधेयक की किन मामलों में आलोचना की जा रही है?

भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र कई प्रकार की गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। सबसे बड़ी समस्या कमजोर आधारभूत ढाँचे की है। सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र पर जीडीपी का मात्र 1 प्रतिशत के लगभग व्यय किया जाता है। बढ़ता भ्रष्टाचार, डॉक्टरों की कमी एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में नैतिकता एवं गवर्नेस का गिरता स्तर प्रमुख समस्यायें हैं।

नेशनल मेडिकल कमीशन विधेयक, 2017 मेडिकल गवर्नेस की स्थिति में किस प्रकार सुधार ला सकता है?

  • नेशनल मेडिकल कमीशन विधेयक, 2017 वर्ष 1956 के इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट को प्रतिस्थापित कर मेडिकल गवर्नेस की स्थिति को सशक्त बनायेगा।
  • यह देशभर में नीट (NEET) के माध्यम से मेडिकल प्रवेश परीक्षा का आयोजन करेगा जिससे सभी राज्यों के विद्यार्थियों को समान स्तर प्राप्त हो सकेगा।
  • नेशनल मेडिकल कमीशन विधेयक, 2017 में स्वायत्तशासी बोर्डों की व्यवस्था की गयी है। ये स्वायत्तशासी बोर्ड अण्डर ग्रेजुएट एवं पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों मे प्रवेश का विनियमन करेंगे।
  • ब्रिज कोर्सों (Bridge Courses) का संचालन किया जायेगा जिसके तहत आयुष डॉक्टर एलोपैथ की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी।
  • नेशनल मेडिकल कमीशन के द्वारा ही नये मेडिकल कालेजों को मान्यता प्रदान की जायेगी जिससे भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
  • मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में अवैध गतिविधियों को नियंत्रित किया जायेगा। जिससे योग्य अभ्यर्थियों को ही प्रवेश मिल सकेगा। योग्य अभ्यर्थियों के प्रवेश से योग्य डॉक्टर सामने आयेंगे।

नेशनल मेडिकल कमीशन की किन मामलों मे आलोचना की जा रही है?

  • मेडिकल काउंसिल ऑफ इण्डिया की तरह नेशनल मेडिकल कमीशन के सदस्यों को सरकार के द्वारा ही चुना जायेगा अतः इस नये आयोग में भी सरकार का पूर्ववत हस्तक्षेप बना रहेगा।
  • मेडिकल एडवायजरी काउंसिल भी नेशनल मेडिकल कमीशन के अधीन होंगी। यह व्यवस्था नेशनल मेडिकल कमीशन को अधिक शक्तिशाली निकाय बना देती है।
  • आयुष डॉक्टरों को एलोपैथ की प्रैक्टिस का अवसर देने के लिए ब्रिज कोर्स संचालित किया जायेगा। इससे लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है क्योंकि आयुष डॉक्टर एलोपैथ के विषय मे अधिक कुशलता नहीं रखते हैं।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि प्रस्तावित नेशनल मेडिकल कमीशन विधेयक, 2017 देश में मेडिकल गवर्नेस की स्थिति मे सुधार लाने में सक्षम है। किंतु इसके सम्बंध में उपर्युक्त उल्लिखित चुनौतियों पर भी ध्यान देने की जरुरत है।

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