कहानी
प्रेमचन्द के अनुसार ”गल्प (कहानी) एक ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथाविन्यास सब उसी भाव को पुष्ट करते हैं।“
अज्ञेय के मतानुसार, ”कहानी जीवन की प्रतिच्छाया है और जीवन स्वयं एक अधूरी कहानी, एक शिक्षा है जो उम्र भर चलती है और समाप्त नहीं होती।“
सैय्यद इंशा अल्ला खाँ ः रानी केतकी की कहानी (1803)
शिव प्रसाद ‘सितारेहिन्द’ ः राजा भोज का सपना (1852)
किशोरीलाल गोस्वामी ः ‘इन्दुमती’ (1900)
नोट: आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इसे ‘हिन्दी की पहली मौलिक कहानी’ माना है।
प्रेमचन्द: पंच परमेश्वर (1916), पूस की रात, शतरंज के खिलाड़ी, नमक का दरोगा, मंत्र, बड़े घर की बेटी, कफ़न, गृहदाह, बड़े भाई साहब, ईदगाह, बूढ़ी काकी, मानसरोवर (8) खण्डों में (प्रेमचन्द की लगभग 300 से अधिक कहानियों का संकलन)
नोट: 1. प्रेमचन्द की आरम्भिक रचनाओं पर गाँधीवादी आदर्शवाद का प्रभाव है तथा बाद की रचनाओं पर यर्थाथोन्मुख आदर्शवाद का प्रभाव दिखाई पड़ता है।
2 प्रारम्भिक प्रेमचन्द गाँधी से प्रभावित है तथा उत्तरवर्ती प्रेमचन्द कार्ल माक्र्स से प्रभावित है।
3. प्रेमचन्द की पहली कहानी ‘पंच परमेश्वर’ है तथा उनके अन्तिम लेख ‘महाजनी सभ्यता’ को उनका ‘वसीयतनामा’ कहा जाता है।