समास-3

2.            तत्पुरूष समास - जिस समास में बाद का अथवा उत्तरपद प्रधान होता है तथा दोनों पदों के बीच का कारक चिह्न लुप्त हो जाता है, उसे तत्पुरूष समास कहते हैं; जैसे-

राजा का कुमार 

राजकुमार

धर्म का ग्रन्थ

धर्मग्रन्थ

रचना को करने वाला

रचनाकार

तत्पुरुष समास के भेद-   

तत्पुरुष समास के भेद विभक्तियों के नामों के अनुसार छः भेद है-

  • कर्म तत्पुरुष समास
  • करण तत्पुरुष समास
  • सम्प्रदान तत्पुरुष समास
  • अपादान तत्पुरुष समास
  • सम्बन्ध तत्पुरुष समास
  • अधिकरण तत्पुरुष समास

I              कर्म तत्पुरुष समास (द्वितीया तत्पुरुष समास): इसमें कर्म कारक की विभक्ति ‘को’ का लोप हा जाता है; जैसे-

समास विग्रह

समस्त पद

गगन को चुमने वाला

गगनचुम्बी

यश को प्राप्त

यशप्राप्त

चिड़ियों को मारने वाला

चिड़ीमार

ग्राम को गया हुआ

ग्रामगत

रथ को चलाने वाला

रथचालक

जेब को कतरने वाला

जेबकतरा

 II.          करण तत्पुरुष समास (तृतीया तत्पुरुष समास): इसमें कर्म कारक की विभक्ति ‘से’, ‘के द्वारा’ का लोप हा जाता है; जैसे-

समास विग्रह

समस्त पद

करूणा से पूर्ण

करूणापूर्ण

भय से आकुल

भयाकुल

रेखा से अंकित

रेखांकित

शोक से ग्रस्त

शोकग्रस्त

मद से अंधा

मदांध

मन से चाहा

मनचाहा

पद से दलित

पददलित

सूर द्वारा रचित

सूररचित

प्रकृति से प्रदत्य

प्रकृति प्रदत्य

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