भौतिक विज्ञान : यान्त्रिकी (अदिश व सदिश राशियां - ii)

        Day - 19

             अतः किसी भी राशि की माप करने के लिए उसी राशि के एक निश्चित परिणाम को मानक मान लिया जाता है और उसे कोई नाम दे दिया जाता है। इसी को उस राशि का मात्रक कहते हैं। किसी दी हुई राशि की उसके मात्रक से तुलना करने की क्रिया को मापन कहते हैं।

          मात्रक दो प्रकार के होते हैं – (i) मूल मात्रक तथा (ii) व्युत्पन्न मात्रक

          मूल भौतिक राशियों [जैसे, लम्बाई, द्र्व्यमान (संहति), समय, आदि] के मात्रकों को मूल मात्रक कहते हैं तथा व्युत्पन्न राशियों (मूल राशियों के अतिरिक्त सभी राशियां) के मात्रकों को व्युत्पन्न मात्रक कहते है। उदाहरण के लिए, द्रव्यमान, ल्म्बाई व समय के मात्रक क्रमशः किलोग्राम, मीटर व सेकेण्ड हैं तथा ये मूल मात्रक हैं।

     1971 में माप और तौल की अन्तर्राष्ट्रीय समिति द्वारा पदार्थ की मात्रा की मूल राशि मानते हुए मोल को इसका मूल मात्रक निर्धारित किया गया। इस प्रकार सात भौतिक राशियों – लम्बाई, समय, द्रव्यमान, विद्युत धारा, ताप, ज्योति तीव्रता और पदार्थ की मात्रा को मूल राशियां कहते हैं।

     अन्य भौतिक राशियों के मात्रक इन सात आधारी मात्रकों से प्राप्त होते हैंऔर इस्लिए इन मात्रकों को व्युत्पन्न मात्रक कहते हैं। जैसे – क्षेत्रफल का मात्रक वर्गमीटर, घनत्व का मात्रक किलोग्राम प्रति घनमीटर, वेग का मात्रक जूल, विभवान्तर का मात्रक वोल्ट आदि।

 शेष फिर अगले नोटस् में ..  मात्रक पध्दतियां

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