क्रमशः -
Day - 44
- अनुच्छेद 4- में यह स्पष्ट किया गया हैं कि अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन बनाई गई विधि में ऐसे उपबन्ध हो सकते हैं जो विधि के उपबन्धों रो प्रभावी करने के लिए आवश्यक हो और उनमें ऐसे अनुपूरक, आनुषंगित और पारिणामिक उपबन्ध हो सकते हैं जो आवश्यक समझे जाएं। ऐसे विधान द्वारा संसद विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या को जो अनुच्छेद 170 में विहित सीमा (60 सदस्य) से भी नीचे कर सकती हैं।
- अनुच्छेद 3 और 4 में उल्लिखित राज्यों का निर्माण संसदीय विधान द्वारा ही किया जा सकता है। संसद की मंजूरी प्राप्त किए बिना कार्यपालिका के आदेश से यह कार्य नहीं हो सकता। 1954 में अधिनियम बनाकर चन्द्रनगर का जो फ्रांस का उपनिवेश था, पश्चिम बंगाल में विलय किया गया।
- सन् 1956 में भारत द्वारा फ्रांस की हस्तान्तरण सन्धि पर हस्ताक्षर किए गए, फलतः भारत को चन्द्रनगर, माहे, यनाम तथा कारका फ्रांसीसी उपनिवेश प्राप्त हुए। इन सभी को मिलाकर ‘पाण्डिचेरी’ का एक नये संघ राज्य क्षेत्र के रूप में गठन किया गया।
भारत सरकार ने सन् 1961 में गोवा, दमन और दीव को जीतकर भारत में मिलाकर इसे एक संघ-राज्य क्षेत्र बना दिया गया। इसी तरह बम्बई प्रानन्त में दो भाषा-भाषियों के पारस्परिक संघर्ष के कारण 1 मई, 1960 को बम्बई को विभाजित कर गुजरात राज्य का गठन किया गया। सन् 1961-62 में असम को विभाजित कर नागालैण्ड, सन् 1966 में पंजाब को विभाजित कर हरियाणा राज्य का दर्जा दे दिया गया। सन् 1971 में हिमालयन प्रदेश तथा मेघालय, सन् 1975 में सिक्किम को, सन् 1986 में अरुणांचल प्रदेश तथा मिजोरम को एवं 1987 में गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान किया गया। 1 नवम्बर, 2000 को मध्यप्रदेश को विभाजित कर छत्तीसगढ़ राज्य का, 9 नवम्बर, 2000 उत्तर प्रदेश को विभाजित कर उत्तराखण्ड राज्य का, तथा 15 नवम्बर, 2000 को बिहार को विभाजित कर झारखण्ड राज्य का गठन किया गया। इसी प्रकार वर्ष 2014 को 29वॉ राज्य तेलांगाना बना।
मिलते है हम अगले दिन, क्षेत्रीय परिषदें विषय पर फिर आगे चर्चा करने के लिये..