भारतीय संविधान Easy Notes - 45 (प्रमुख संशोधन)

Day - 45

'ध्यान दें अभी हम लोगों का नया विषय क्षेत्रीय परिषदें पर चर्चा करनी थी, लेकिन समय के साथ- साथ जो परिवर्तन (संशोधन) हमारे संविधान में हुए है उनके बारे में हम कुछ प्रकाश डालते हुए आगे बढ़े जिससे हमें कुछ विषयों पर चर्चा करने में सरलता बनी रहेगी।'

                   संविधान में समय-समय पर आवश्यकता होने पर संशोधन होते रहे हैं. विधायिनी सभा में किसी विधेयक में परिवर्तन, सुधार अथवा उसे निर्दोष बनाने की प्रक्रिया को 'संशोधन' कहा जाता है. सभा या समिति के प्रस्ताव के शोधन की क्रिया के लिए भी इस शब्द का प्रयोग होता है. किसी भी देश का संविधान कितनी ही सावधानी से बनाया जाए, किंतु मनुष्य की कल्पना शक्ति की सीमा बंधी हुई है.

                 1. पहला संशोधन (1951): इसके माध्यम से स्वतंत्रता, समानता एवं संपत्ति से संबंधित मौलिक अधिकारों को लागू किए जाने संबंधी कुछ व्यवहारिक कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया गया. भाषण एवं अभिव्यक्ति के मूल अधिकारों पर इसमें उचित प्रतिबंध की व्यवस्था की गई. साथ ही, इस संशोधन द्वारा संविधान में नौंवी अनुसूची को जोड़ा गया, जिसमें उल्लिखित कानूनों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्तियों के अंतर्गत परीक्षा नहीं की जा सकती है.

                2. दूसरा संशोधन (1952): इसके अंतर्गत 1951 की जनगणना के आधार पर लोक सभा में प्रतिनिधित्व को पुनर्व्यवस्थित किया गया.

                3. तीसरा संशोधन (1954): अंतर्गत सातवीं अनुसूची को समवर्ती सूची की 33वीं प्रविष्टी के स्थान पर खाद्यान्न, पशुओं के लिए चारा, कच्चा कपास, जूट आदि को रखा गया, जिसके उत्पादन एवं आपूर्ति को लोकहित में समझने पर सरकार उस पर नियंत्रण लगा सकती है.

शेष.....

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