समास-4

III.          सम्प्रदान तत्वपुरुष (चतुर्थी तत्वपुरुष) : इसमें सम्प्रदान कारक की विभक्ति ‘के लिए’ लुप्त हो जाती है; जैसे

समास विग्रह

समस्त पद

प्रयोग के लिए शाला

प्रयोगशाला

स्नान के लिए घर

स्नानघर

यज्ञ के लिए शाला

यज्ञशाला

गौ के लिए शाला

गौशाला

देश के लिए भक्ति

देशभक्ति

डाक के लिए गाड़ी

डाकगाड़ी

परीक्षा के लिए भवन

परीक्षाभवन

हाथ के लिए कड़ी

हाथकड़ी

 IV.         अपादान तत्वपुरुष (पंचमी तत्वपुरुष) : इसमें अपादान कारक की विभक्ति ‘से’ (अलग होने का भाव) लुप्त हो जाती है; जैसे

विग्रह

समस्त पद

धन से हीन

धनहीन

पथ से भ्रष्ट

पथभ्रष्ट

पद से च्युत

पदच्युत

देश से निकाला

देशनिकाला

ऋण से मुक्त

ऋणमुक्त

गुण से हीन

गुणहीन

पाप से मुक्त

पापमुक्त

जल से हीन

जलहीन

रोग से मुक्त

रोगमुक्त

V.           सम्बन्ध तत्पुरुष (षष्ठी तत्पुरुष) समास - इसमें सम्बन्ध कारक की विभक्ति ‘का, के, की’ लुप्त हो जाती है; जैसे-

विग्रह

समस्त पद

राजा का पुत्र

राजपुत्र

राजा की आज्ञा

राजाज्ञा

पर के अधीन

पराधीन

पवन का कुमार

पवनकुमार

सेना का पति

सेनापति

देश की रक्षा

देशरक्षा

शिव का आलय

शिवालय

गृह का स्वामी

गृहस्वामी

विद्या का सागर

विद्यासागर

लोक के नायक

लोकनायक

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