III. सम्प्रदान तत्वपुरुष (चतुर्थी तत्वपुरुष) : इसमें सम्प्रदान कारक की विभक्ति ‘के लिए’ लुप्त हो जाती है; जैसे
|
समास विग्रह
|
समस्त पद
|
|
प्रयोग के लिए शाला
|
प्रयोगशाला
|
|
स्नान के लिए घर
|
स्नानघर
|
|
यज्ञ के लिए शाला
|
यज्ञशाला
|
|
गौ के लिए शाला
|
गौशाला
|
|
देश के लिए भक्ति
|
देशभक्ति
|
|
डाक के लिए गाड़ी
|
डाकगाड़ी
|
|
परीक्षा के लिए भवन
|
परीक्षाभवन
|
|
हाथ के लिए कड़ी
|
हाथकड़ी
|
IV. अपादान तत्वपुरुष (पंचमी तत्वपुरुष) : इसमें अपादान कारक की विभक्ति ‘से’ (अलग होने का भाव) लुप्त हो जाती है; जैसे
|
विग्रह
|
समस्त पद
|
|
धन से हीन
|
धनहीन
|
|
पथ से भ्रष्ट
|
पथभ्रष्ट
|
|
पद से च्युत
|
पदच्युत
|
|
देश से निकाला
|
देशनिकाला
|
|
ऋण से मुक्त
|
ऋणमुक्त
|
|
गुण से हीन
|
गुणहीन
|
|
पाप से मुक्त
|
पापमुक्त
|
|
जल से हीन
|
जलहीन
|
|
रोग से मुक्त
|
रोगमुक्त
|
V. सम्बन्ध तत्पुरुष (षष्ठी तत्पुरुष) समास - इसमें सम्बन्ध कारक की विभक्ति ‘का, के, की’ लुप्त हो जाती है; जैसे-
|
विग्रह
|
समस्त पद
|
|
राजा का पुत्र
|
राजपुत्र
|
|
राजा की आज्ञा
|
राजाज्ञा
|
|
पर के अधीन
|
पराधीन
|
|
पवन का कुमार
|
पवनकुमार
|
|
सेना का पति
|
सेनापति
|
|
देश की रक्षा
|
देशरक्षा
|
|
शिव का आलय
|
शिवालय
|
|
गृह का स्वामी
|
गृहस्वामी
|
|
विद्या का सागर
|
विद्यासागर
|
|
लोक के नायक
|
लोकनायक
|