हाल के समय में मध्य पूर्व के क्षेत्र में रुस काफी सक्रियता से हसतक्षेप कर रहा है, स्पष्ट कीजिए। रुस के इस प्रकार के हस्तक्षेप से इस क्षेत्र की शांति व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा? साथ ही बताइए कि रुस का यह हस्तक्षेप भारत के हितों को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है

हाल के समय में विश्व की राजनीति पर अमेरिका का प्रभाव कुछ कम हुआ है जबकि रुस एवं चीन के द्वारा अमेरिका के स्थान को सक्रियता से भरने का प्रयास किया जा रहा है। रुस मध्य-पूर्व (middle-east) के क्षेत्र में काफी अधिक सक्रिय है। वह सीरिया, ईरान, यमन आदि देशों के मुद्दे पर सक्रिय हस्तक्षेप कर रहा है।

ज्ञातव्य है कि रुस के द्वारा सीरिया में असद सरकार का समर्थन किया गया जिससे असद सरकार के ऊपर से अमेरिकी दबाव को कम करने में मदद मिली थी। इसी प्रकार रुस के द्वारा ईरानी सरकार को मदद उपलब्ध करायी जा रही है। सबसे बढ़कर रुस के द्वारा अफगानिस्तान को भी मदद उपलब्ध कराकर उससे करीबी सम्बंध बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

मध्य-पूर्व में रुस के हस्तक्षेप से इस क्षेत्र की शांति-व्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभावः

  • रुस के द्वारा मध्य-पूर्व में उन देशों का समर्थन किया जा रहा है जिनका अमेरिका एवं नाटो के द्वारा विरोध किया जा रहा है। यदि यह स्थिति बनी रही तो इस क्षेत्र मे संघर्ष बढ़ सकता है।
  • रुस इस क्षेत्र के देशों के ऊपर अपनी तानाशाही स्थापित कर सकता है जैसा कि पूर्व सोवियत संघ के द्वारा किया जाता था। इससे इस क्षेत्र में संघर्ष की स्थिति बनी रह सकती है।
  • सबसे बढ़कर इस प्रकार के हस्तक्षेप से सीधे अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती मिल रही है जिसके प्रतिउत्तर में अमेरिका भी कदम उठा सकता है और मध्य-पूर्व के साथ-साथ सम्पूर्ण विश्व को युद्ध की विभीषिका का सामना करना पड़ सकता है।

रुस के हस्तक्षेप से भारतीय हितों पर पड़ने वाला प्रभावः

  • यद्यपि रुस भारत का सदाबहार मित्र रहा है किंतु वर्तमान में जिस प्रकार से रुस की नजदीकी चीन एवं पाकिस्तान से बढ़ रही है उससे भारतीय हितों को हानि पहुँच सकती है।
  • मध्य-पूर्व में भारी संख्या में प्रवासी भारतीय निवास करते हैं जो प्रतिवर्ष बड़ी मात्र में रेमिटांस भेजते हैं। यदि इस क्षेत्र में अशांति उत्पन्न हुयी तो प्रवासी भारतीयों को भी संकट का सामना करना पड़ेगा।
  • रुस, चीन एवं पाकिस्तान का गठजोड़ भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी गंभीर संकट का कारण बन सकता है। ज्ञातव्य है कि भारत अपनी अधिकांश ऊर्जा जरुरतों (तेल, गैस) के लिए मध्य-पूर्व क्षेत्र पर निर्भर है।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि मध्य-पूर्व क्षेत्र में रुस का हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है। यह हस्तक्षेप इस क्षेत्र की शांति व्यवस्था के साथ-साथ भारतीय हितों के लिए भी संकट उत्पन्न कर सकता है।

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