लाभ के पद से आपका क्या तात्पर्य है, सविस्तार स्पष्ट कीजिए? हाल ही में किस कारण से दिल्ली विधानसभा के 20 विधायकों को लाभ के पद के मामले मे अयोग्य घोषित किया गया है? लाभ के पद के मामले में अयोग्य ठहरायें गये विधायकों के पास आगे क्या रास्ता शेष बचा है?

लाभ के पद से तात्पर्य ऐसे पद से है जिसके एवज में वेतन भत्ते या अन्य सुविधायें प्राप्त होती हों। भारतीय संविधान में स्पष्टतः उल्लेख किया गया है कि यदि कोई जनप्रतिनिधि लाभ का पद धारण करता है तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जायेगा।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 102-1ए के अंतर्गत स्पष्ट किया गया है कि कोई भी सांसद या विधायक किसी ऐसे पद को नहीं धारण कर सकते जिसके तहत कोई वेतन, भत्ता या अन्य दूसरे लाभ प्राप्त होते हों। इसी प्रकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 191-1ए तथा जनप्रतिनिधित्व कानून की धरा 9A के अंतर्गत भी सांसदों एवं विधायकों को अन्य लाभ लेने से रोका गया है। जब भी कोई लाभ के पद का मामला सामने आता है तो राष्ट्रपति उस मामले को चुनाव आयोग को भेजते हैं। चुनाव आयोग की सिफारिश को राष्ट्रपति स्वीकार करते हैं।

दिल्ली विधानसभा के 20 विधायकों को लाभ के पद के मामले में अयोग्य घोषित करने का मामलाः

  • फरवरी 2015 में दिल्ली विधानसभा के चुनाव आयोजित किये गये जिसमें आम आदमी पार्टी को कुल 70 सीटों में से 67 सीटें प्राप्त हुयीं।
  • इन 67 विधायकों में से 21 विधायकों को दिल्ली सरकार के तमाम मंत्रालयों में संसदीय सचिव का पद दे दिया गया।
  • चूँकि संसदीय सचिव का पद लाभ के पद के दायरे में आता है अतः आम आदमी पार्टी के इन 21 विधायकों के विरुद्ध शिकायत की गयी।
  • राष्ट्रपति ने यह मामला चुनाव आयोग को भेज दिया। चुनाव आयोग ने हाल ही में इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की है। जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। यह निर्णय आप के 20 विधायकों पर ही लागू होगा क्योंकि आप के एक विधायक जरनैल सिंह ने पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया था।

अयोग्य ठहराये गये विधायकों के पास आगे क्या रास्ता शेष बचा है?

  • लाभ के मामले में अयोग्य ठहराये गये विधायकों के पास अब हाइकोर्ट जाने का मार्ग शेष बचा है। हाइकोर्ट के आदेश के विरुद्ध वे सर्वोच्च न्यायालय भी जा सकते हैं।
  • यदि कोई कानूनी समस्या नहीं आती है तो राष्ट्रपति के आदेश को ही लागू कराया जायेगा और 20 विधायकों को अयोग्य घोषित किया जायेगा।
  • इन सभी 20 सीटों पर 6 महीने के भीतर उपचुनाव कराये जायेंगे। यदि न्यायालय की ओर से अधिक समय लिया जाता है तो उपचुनाव में 6 माह से अधिक का समय लग सकता है।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि कोई जनप्रतिनिधि लाभ के पद में नहीं रह सकता है। संसदीय सचिव का पद लाभ के पद में आता है अतः आप के विधायकों को अयोग्य ठहराये जाने का निर्णय संविधान के अनुरुप है।

Posted on by