मीडिया को लोकतंत्र का चतुर्थ स्तम्भ माना जाता है, स्पष्ट कीजिए। क्या मीडिया के लिए स्वविनियमन आवश्यक है? इसके पक्ष में समुचित तर्क प्रस्तुत कीजिए। साथ ही बताइए कि स्वविनियमन के साथ मीडिया पर वैधानिक नियंत्रण का होना क्यों जरुरी है?

मीडिया का लोकतांत्रिक व्यवस्था में अहम स्थान है। इसे कार्यपालिका, विधायिका एवं न्यायपालिका के पश्चात् लोकतंत्र का चतुर्थ स्तम्भ माना जाता हैं। स्वतंत्र अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने, वंचित वर्गों की आवाज को नीति नियामकों तक पहुँचाने तथा जरुरी सूचनाओं को आम जनता तक पहुँचाने में मीडिया की अहम भूमिका होती हैं

मीडिया के स्वविनियमन के पक्ष में तर्कः

  • निश्चित तौर पर मीडिया का स्वविनियमन आवश्यक है ताकि बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के मीडिया स्वतंत्र अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित कर सके।
  • स्वविनियमन से मीडिया स्वयं को समाज के प्रति उत्तरदायी बना सकता है। बेहतर प्रतिभाओं की नियुक्ति कर अपने द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं में महव्तपूर्ण सुधार ला सकता है।
  • मीडिया के माध्यम से कार्यपालिका एवं विधायिका के द्वारा उठाये गये कदमों से आम जनता को परिचित कराया जाता है तथा कार्यपालिका पर नियंत्रण भी रखा जाता है ताकि कार्यपालिका के द्वारा कोई ऐसा कदम न उठाया जा सके जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरुप न हो।
  • ऐसी स्थिति में यदि मीडिया पर स्वविनियमन के स्थान पर कार्यपालिका के द्वारा नियमत किया जायेगा तो हितों के संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होगी। सम्भवतः मीडिया स्वतंत्रतापूर्वक कार्य भी नहीं कर सकेगा।
  • यदि मीडिया स्वविनियमित होगा तो उस पर सेंसरशिप का भी दबाव नहीं होगा। सबसे बढ़कर सेंसरशिप के अभाव मे मीडिया आलोचनात्मक तरीके से घटनाओं का सही विश्लेषण प्रस्तुत कर सकेगा।

स्वविनियमन के साथ मीडिया पर वैधानिक नियंत्रण भी आवश्यक हैः

  • आजकल मीडिया हाऊस के द्वारा स्वार्थ प्रेरित खबरों का प्रसारण किया जाता है जिसके कारण लोगों को निरपेक्ष खबरें नहीं मिल पाती है। स्वार्थ प्रेरित मीडिया घरानो को नियंत्रित करने के लिए मीडिया पर वैधानिक नियंत्रण जरुरी है।
  • मीडिया में पेड न्यूज का चलन तेजी से बढ़ा है जिसके कारण धन लेकर समाचार प्रसारित करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। इस प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के लिए जरुरी है कि मीडिया पर कुछ वैधानिक नियंत्रण हो।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि मीडिया के लिए स्वविनियमन काफी जरुरी है किंतु स्वविनियमन के साथ-साथ इस पर कुछ वैधानिक नियंत्रण का होना भी जरुरी है ताकिर पेड न्यूज जैसी प्रवृत्ति पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

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