हाल ही में जारी किये गये विश्व प्रतिभा प्रतिस्पर्ध सूचकांक का सविस्तार उल्लेख कीजिए। इस सूचकांक में भारत की स्थिति की ब्रिक्स देशों से तुलना कीजिए। इस सूचकांक में भारत की स्थिति के क्या निहितार्थ हैं?

हाल ही में विश्व प्रतिभा प्रतिस्पर्ध सूचकांक (Global Talent Competitiveness Index) कों जारी किया गया हैं। इसमें स्विट्जरलैण्ड को प्रथम स्थान तथा सिंगापुर एवं संयुक्त राज्य अमेरिका को क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्रदान किया गया है। इस सूचकांक में यूरोपीय देशों का दबदबा है क्योंकि शीर्ष 25 में से 15 स्थान यूरोपीय देशों को प्राप्त हुए हैं।

विश्व प्रतिभा प्रतिस्पर्ध सूचकांक को इनसीड, एडीको समूह एवं टाटा कम्यूनिकेसंश के साथ मिलकर तैयार किया गया है। वस्तुतः प्रतिभा प्रतिस्पर्ध सूचकांक इस बात का संकेतक है कि कोई देश किस प्रकार से प्रतिभाओं के पलायन को रोंक पाने में सफल रहता है।

विश्व प्रतिभा प्रतिस्पर्ध सूचकांक में भारत की ब्रिक्स देशों के सापेक्ष तुलनाः

विश्व प्रतिभा प्रतिस्पर्ध सूचकांक, 2018 की सूची में भारत को 81वाँ  स्थान प्रदान किया गया है जबकि पिछले वर्ष के सूचकांक में भारत को 92वाँ स्थान प्रदान किया गया था। इस प्रकार भारत ने अपनी स्थिति में 11 अंकों को सुधार किया है किंतु ब्रिक्स देशों के सापेक्ष भारत की स्थिति अभी भी कमजोर बनी हुयी है।

  • विश्व प्रतिभा प्रतिस्पर्ध सूचकांक में चीन को 43वाँ स्थान प्रदान किया गया है जबकि रुस को 53वाँ स्थान दिया गया है।
  • इसी प्रकार इस सूचकांक में दक्षिण अफ्रीका का 63वाँ और ब्राजील को 73वाँ स्थान प्रदान किया गया है।
  • इस प्रकार उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि प्रतिभाओं के विकास, उन्हें देश में रोंके रखने एवं प्रतिभाओं के पलायन को रोकने के मामले में भारत ब्रिक्स देशों के मुकाबले कमजोर स्थिति में है।

विश्व प्रतिभा प्रतिस्पर्ध सूचकांक में भारत की स्थिति के निहितार्थः

  • विश्व प्रतिभा प्रतिस्पर्ध सूचकांक में भारत की स्थिति काफी कमजोर है। इस स्थिति के निम्न निहितार्थ हैं-
  • भारत को प्रतिभाओं के विकास, उन्हे आकर्षित करने एवं ब्रेन ड्रेन (Brain Drain)  को रोंकने के लिए अहम कदम उठाने होंगे। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक कौशल उपलब्ध कराना होगा।
  • एक नमनीय (Flexible) विनियामक एवं व्यापारिक माहौल का सृजन करना होगा।
  • ऐसी रोजगार नीतियों को लागू करना होगा नमनीय होने के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा से सम्बंधित हों।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि विश्व प्रतिभा प्रतिस्पर्ध सूचकांक में भारत की स्थिति काफी कमजोर है। इस स्थिति में सुधार के लिए उपर्युक्त उल्लेखित उपायों पर कार्य करने की आवश्यकता है।
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