यद्यपि सर्वोच्च न्यायलय के द्वारा राइट टू प्राइवेसी को मौलिक अधिकार माना गया है किंतु देश में डाटा सुरक्षा की समुचित व्यवस्था के अभाव में राइट टू प्राइवेसी का कोई विशेष अर्थ नहीं रह जाता है। देश में डाटा चोरी से सम्बंधित हालिया घटनाओं का उल्लेख कीजिए। डाटा की समुचित सुरक्षा के लिए किन कदमों को उठाये जाने की जरूरत है?

सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा राइट टू प्राइवेसी (Right to Privacy) को मौलिक अधिकार के रूप में घोषित किया जा चुका हैं राइट टू प्राइवेसी को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित माना गया है।

किंतु राइट टू प्राइवेसी के लिए देश में एक सशक्त डाटा सुरक्षा व्यवस्था का होना अनिवार्य है। ज्ञातव्य है कि डाटा सुरक्षा के बिना राइट टू प्राइवेसी का अधिक महत्व नहीं रह जाता है। यही कारण है कि डाटा सुरक्षा को पुख्ता बनाने के लिए समुचित प्रणाली को शीघ्रातिशीघ्र क्रियान्वित करना आवश्यक है।

देश में डाटा की चोरी से सम्बंधित हालिया घटनायेः

  • हाल ही में आधार कार्ड धारकों की गोपनीय सूचनाओं के लीक होने की कई घटनायें सामने आयी हैं जिसे साबित होता है कि आधार कार्ड के तहत ली गयी सूचनाओं का दुरूपयोग किया जा सकता है।
  • एयरटेल के द्वारा लोगों की अनुमति लिए बगैर उनके  आधार कार्ड की जानकारी का उपयोग करके बैंक एकांउट खोल दिये गये। इस सम्बंध में एयरटेल को यूआईडीएआई के द्वारा दण्डित भी किया गया।
  • हाल ही में ऐसी घटनायें सामने आयी हैं जिनके तहत  ठगों ने लोगों के आधार कार्ड की जानकारी चुराकर उनके खाते से धन का हस्तांतरण कर लिया।
  • वर्ष 2016 एवं 2017 में कई सरकारी वेबसाइटों के द्वारा बार-बार कई लोगों के आधार नंबर के साथ-साथ उनके नाम, पते एवं फोन नंबर पोस्ट किये गये।
  • हाल ही में ट्रिब्यून समाचार पत्र के द्वारा एक स्टिंग किया गया जिसमें दिखाया गया कि किस प्रकार मात्र 500 रूपये देकर 1 अरब आधार खातों तक आसानी से पहुँच स्थापित की जा सकती है। इसी प्रकार यदि 300 रूपये और खर्च कर दिए जायें तो वह साफ्टवेयर प्राप्त किया जा सकता है जिससे  किसी भी व्यक्ति के आधार कार्ड का प्रिंट निकाला जा सकता है।

डाटा की समुचित सुरक्षा के लिए उठाये जाने वाले कदमः

  • इंटरनेट के इस युग में डाटा का सर्वाधिक महत्व है। यही कारण है कि डाटा की सुरक्षा के लिए पुख्ता व्यवस्था की जानी चाहिए। इस सम्बंध में केन्द्र सरकार का प्रयास सराहनीय है।
  • ज्ञातव्य है कि केन्द्र सरकार के द्वारा डाटा की सुरक्षा से सम्बंधित कानून की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।
  • राइट टू प्राइवेसी को भारतीय संविधान के अनुच्छेद  21 में शामिल करने के लिए समुचित संशोधन किया जाना चाहिए ताकि इसे संवैधानिक आधार मिल सके।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भारत में डाटा की सुरक्षा से सम्बंधित व्यवस्था काफी कमजोर है। इस व्यवस्था को अविलम्ब मजबूत बनाये जाने की जरूरत है क्योंकि डाटा की गोपनीयता के उल्लंघन की समस्यायें तेजी से बढ़ती जा रही है।

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