4. द्विगु समास : जिस समस्त पद (सामासिक शब्द) का पूर्व पद संख्यावाचक हो और समूह या समाहार का बोध कराये, द्विगु समास कहलाता है।
इसका विग्रह करते समय अंत में ‘का समूह’ जैसे शब्द का व्यवहार किया जाता है।
|
समस्त पद
|
विग्रह
|
|
सप्तसिन्धू
|
सात सिन्धुओं का समूह
|
|
दोपहर
|
दो पहरों का समूह
|
|
त्रिलोक
|
तीनों लोको का समाहार
|
|
चैराहा
|
चार राहों का समूह
|
|
नवरात्र
|
नौरात्रियों का समूह
|
|
सप्तऋषि/सप्तर्षि
|
सात ऋषियों का समूह
|
|
पंचमढ़ी
|
पाँच मढ़ियों का समूह
|
|
सप्ताह
|
सात दिनों का समूह
|
|
त्रिकोण
|
तीन कोणों का समाहार
|
|
तिरंगा
|
तीन रंगों का समूह
|
|
त्रिफला
|
तीन फलों का समूह
|
|
नौरात्री
|
नौ रात्रियों का समूह
|
|
अष्टाध्यायी
|
आठ अध्यायों का समूह
|
|
शताब्दी
|
सौ सालों का समूह (शत-सौ, अब्दो-वर्षो)
|
5. द्वन्द्व समास : जिस समस्त पद (सामासिक शब्द) के दोनों पद प्रधान हों तथा विग्रह करने पर ‘और’, ‘अथवा’, ‘या’, ‘एवं’ लगता हो वह द्वन्द्व समास कहलाता है।
पहचान-दोनों पदों के बीच प्रायः योजक चिह्न (-) का प्रयोग।
|
समस्त पद
|
विग्रह
|
|
नदी-नाले
|
नदी और नाले
|
|
पाप-पुण्य
|
पाप और पुण्य
|
|
सुख-दुख
|
सुख और दुःख
|
|
गुण-दोष
|
गुण और दोष
|
|
देश-विदेश
|
देश और विदेश
|
|
ऊँच-नीच
|
ऊँच या नीच
|
|
आगे-पीछे
|
आगे और पीछे
|
|
राजा-प्रजा
|
राजा और प्रजा
|
|
नर-नारी
|
नर और नारी
|
|
खरा-खोटा
|
खरा या खोटा
|
|
राधा-कष्ण
|
राधा और कृष्ण
|
|
छल-कपट
|
छल और कपट
|
|
ठंडा-गरम
|
ठंडा या गरम
|
|
अपना-पराया
|
अपना और पराया
|
|
माता-पिता
|
माता और पिता
|
|
गुरु-शिष्य
|
गुरु और शिष्य
|
|
धनुष-वाण
|
धनुष और वाण
|
|
बिस्तर-चारपाई
|
बिस्तर और चारपाई
|
|
उमा-महेश्वर
|
उमा और महेश्वर
|
|
यश-अपयश
|
यश और अपयश
|
|
दिन-रात
|
दिन और रात
|