समास-7

6.            बहुव्रीहि समास : जिस समस्त पद (सामासिक शब्द) के दोनों पद अप्रधान होते है अर्थात् कोई भी पद प्रधान नहीं होता है बल्कि कोई अन्य पद प्रधान हो जाता है, बहुव्रीहि समास कहलाता है। दूसरे शब्दों में, बहुव्रीहि समास में समस्त पद ही किसी अन्य संज्ञा का विशेषण बन जाता है।

               प्रायः बहुव्रीहि समास का प्रयोग करते समय आरम्भ में ‘जो, जिसका’ तथा अन्त में ‘अर्थात’ का प्रयोग अनिवार्यता किया जाता है।

      

समस्त पद

विग्रह

लम्बोदर

लम्बा है उदर जिसका अर्थात् गणेश

दशानन

दस है आनन जिसके अर्थात् रावण

चक्रपाणि

चक्र है पाणि में जिसके अर्थात् विष्णु

महावीर

महान वीर है जो अर्थात् महावीर/हनुमान

चतुर्भुज

चार भुजाएँ है जिसकी अर्थात् विष्णु

प्रधानमंत्री

मंत्रियों में प्रधान है जो अर्थात् प्रधानमंत्री

पंकज

पंक में पैदा हो जो अर्थात् कमल

अनहोनी

न होने वाली घटना अर्थात् कोई विशेष घटना

गिरिधर

गिरि को धारण करने वाला है जो अर्थात् कृष्ण

पीताम्बर

पीत है अम्बर जिसका अर्थात् कृष्ण

निशाचर

निशा मे विचरण करने वाला अर्थात् निशाचर

चैलड़ी

चार है लड़ियाँ जिसमें अर्थात् माला

त्रिलोचन

तीन है लोचन जिसके अर्थात् शिव

विषधर

विष को धारण करने वाला अर्थात् सर्प

मृगेन्द्र

मृगों का इन्द्र अर्थात् सिंह

घनश्याम

घन के समान श्याम है जो अर्थात् कृष्ण

मृत्युंजय

मृत्यु को जीतने वाला अर्थात् शंकर

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