18 जनवरी 2018 को ओड़िशा राज्य के अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर द्वीप) से इंटर कांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि - 5 का सफल परीक्षण किया गया। इस मिसाइल के सफल प्रक्षेपण से भारत दुनिया का पाँचवा ऐसा देश बन गया है जिसके पास अंतर्महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल की क्षमता है।
ज्ञातव्य है कि भारत से पूर्व अमेरिका, रुस, फ्रांस, ब्रिटेन एवं चीन के पास ही अंतर्महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल की क्षमता थी। अग्नि पाँच मिसाइल 5000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक मार करने में सक्षम है तथा यह डेढ़ टन तक के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
अग्नि पाँच मिसाइल की प्रमुख विशेषतायेः
- अग्नि पाँच मिसाइल 17.5 मीटर लम्बी है तथा 2 मीटर चौड़ी है। इसका वजन 50 टन तथा इसकी गति ध्वनि की गति से 24 गुना अधिक है।
- कनस्तर आधारित लांचिग प्रणाली के कारण अग्नि - 5 को सुविधानुसार सड़क मार्ग से कहीं भी ले जाकर प्रक्षेपित किया जा सकता है।
- अग्नि - 5 मिसाइल से एक ही बार में कई परमाणु अस्त्रों को छोड़ा जा सकता है। इसका कारण यह है कि अग्नि - 5 एमआइआरवी (Multiple Independentry Targetable Re-entry vehicle) तकनीक से युक्त है।
- अग्नि - 5 मिसाइल मात्र 20 मिनट में पाँच हजार किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम है।
- अग्नि - 5 मिसाइल तीन चरणों वाली है तथा इसके तीनो चरणों में ठोंस ईंधन का प्रयोग किया जाता है।
- अग्नि - 5 मिसाइल को यदि एक बार छोड़ दिया गया तो इसे रोंकना असंभव होगा। यही कारण है कि इसे भारत ही नहीं बल्कि विश्व की सर्वाधिक शक्तिशाली मिसाइलों में से एक माना जा रहा है।
अग्नि - 5 मिसाइल से देश की सामरिक क्षमता में क्या प्रभाव पड़ेगा?
- अग्नि - 5 मिसाइल से भारत की सामरिक क्षमता में काफी वृद्धि हुयी है। चीन, पाकिस्तान के साथ-साथ अफ्रीका महाद्वीप एवं यूरोप का अधिकांश हिस्सा इस मिसाइल के दायरे में आ गया है।
- इस मिसाइल से देश को पलटवार करने की बेमिसाल ताकत मिल गयी है। साथ ही इसके माध्यम से भारत दुश्मन देश के उपग्रहों को भी नष्ट कर सकता है।
- सबसे बढ़कर इससे भारत की वैश्विक साख मजबूत हुयी है। इसका कारण यह है कि अभी तक आईसीबीएम तकनीकी मात्र अमेरिका, फ्रांस, रुस, चीन और ब्रिटेन के पास ही थी।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि अग्नि - 5 मिसाइल दुनिया की सर्वाधिक शक्तिशाली मिसाइलों में से एक है। इसके सफल परीक्षण से भारत भी आईसीबीएम तकनीकी रखने वाला देश बन गया है। इस मिसाइल से देश की सामरिक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।