हाल ही में इसरो (ISRO) के द्वारा 100 वाँ उपग्रह भेजकर भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का गौरवशाली अतीत और उज्जवल भविष्य एक साथ प्रदर्शित किया गया है, स्पष्ट कीजिए। इस 100 वें मिशन के तहत भेजे गये उपग्रह कार्टोसेट - 2 की प्रमुख विशेषतायें क्या है? साथ ही बताइए कि इस मिशन से इसरो को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय में पकड़ बनाने में किस प्रकार मदद मिलेगी?

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कई उपलब्धियों को अर्जित कर चुके इसरो (ISRO) ने हाल ही में अपना 100 वाँ उपग्रह लाँच करके एक अन्य उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली। पीएसएलवी-सी 40 नामक रॉकेट से इसरों ने यह उपलब्धि् प्राप्त की। उल्लेखनीय है कि इससे पहले पीएसएलवी-सी 39 का प्रक्षेपण असफल रहा था।

पिछली असफलता को पीछे छोड़ते हुए इस बार पीएसएलवी-सी 40 से कार्टोसेट - 2 श्रृंखला के सातवें उपग्रह सहित कुल 31 उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया।

इस दौरान जिन 31 उपग्रहों को प्रक्षेपित किया गया है उनमें 3 भारतीय एवं 28 उपग्रह विदेशी हैं। इन 28 उपग्रहों में कनाडा, अमेरिका, फ्रांस, फिनलैण्ड, दक्षिण कोरिया एवं ब्रिटेन के उपग्रह शामिल हैं। इस प्रक्षेपण के साथ पीएसएलवी रॉकेट ने अपनी विश्वसनीयता को भी साबित कर दिया गया है। ज्ञातव्य है कि पीएसएलवी रॉकेट अभी तक मात्र दो बार असफल रहा है। पहली बार यह सितम्बर 1993 में तथा दूसरी बार अगस्त 2017 में असफल रहा था। इस प्रकार इसरो ने अपने गौरव शाली अतीत एवं उज्जवल भविष्य को एक साथ प्रदर्शित करने का कार्य किया है।

कार्टोसेट - 2 उपग्रह की प्रमुख विशेषतायेः

  • कार्टोसेट - 2 उपग्रह दुश्मन की गतिविधियों पर निगरानी रखने की विशेषज्ञता रखता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि कार्टोसेट - 2 उपग्रह एक अर्थ इमेजिंग उपग्रह है।
  • कार्टोसेट - 2 उपग्रह शहरी एवं ग्रामीण परियोजनाओं की निगरानी करने में भी सक्षम है अतः इसका प्रयोग शहरी एवं ग्रामीण अनुप्रयोगों की निगरानी में किया जा सकता है।
  • कार्टोसेट - 2 उपग्रह का प्रयोग सड़क नेटवर्क, नक्शा बनाने तथा जल वितरण एवं उपयोग जैसी सेवाओं के प्रबंधन में भी किया जा सकता है।
  • सबसे बढ़कर कार्टोसेट - 2 उपग्रह के माध्यम से भारतीय सीमा की निगरानी करने एवं आतंकी गतिविधियों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

यह मिशन अंतरिक्ष प्रोद्योगिकी के अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय में पकड़ बनाने में इसरो की किस प्रकार मदद करेगा?

  • इसरो के इस सफल 100वें मिशन से देश-विदेश की एजेन्सियों का इसरो पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
  • इसरो के द्वारा अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रक्षेपण एजेन्सियों की तुलना में काफी कम कीमत में उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जाता है जिससे विकसित देश भी इसरो की सेवायें लेने को प्राथमिकता प्रदान करते हैं। ज्ञातव्य है कि अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण का किराया पंद्रह से बीस हजार डॉलर प्रतिग्राम पेलोड (उपग्रहों का भार) है।
  • एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार उपग्रह प्रक्षेपण के अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसरो तेजी से अपनी पैठ बढ़ाता जा रहा है। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसरो ने लगभग एक-तिहाई बाजार पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि इसरो ने अपना 100वाँ उपग्रह सफलतापूर्वक भेजकर एक गौरवपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है। इससे इसरो को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पैठ बनाने में मदद मिलेगी।

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