18वीं सदी की औद्योगिक क्रांति के पश्चात् वैश्विक स्तर पर जिस प्रकार से उद्योगों का प्रसार हुआ उससे भारी मात्र में कार्बन उत्सर्जन हुआ। साथ ही पर्यावरण को भारी क्षति भी पहुँची है। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण एवं मृदा प्रदूषण में वृद्धि हुयी है तथा जैवविविधता के लिए संकट उत्पन्न हुआ है।
इस स्थिति में पर्यावरण को संरक्षित रखते हुये विकास के मार्ग परा आगे बढ़ने की बात कही जा रही है क्योंकि एक ओर जहाँ पृथ्वी के अस्तित्व को बनाये रखने की चुनौती है वहीं दूसरी ओर बढ़ती आबादी की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विकास भी आवश्यक है। इस प्रकार भी आवश्यक है। इस प्रकार ऐसा आर्थिक विकास जो पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए प्राप्त किया जाता है उसे ग्रीन ग्रोथ (Green Growth) कहा जाता है। ऐसी ग्रीन ग्रोथ वाली अर्थव्यवस्था को ग्रीन ग्रोथ इकोनॉमी के नाम से जाना जाता है।
ग्रीन ग्रोथ इकोनॉमी के लिए कौन से कदम उठाये जाने आवश्यक हैं?
- ग्रीन ग्रोथ इकोनॉमी के लिए हरित ऊर्जा का प्रमख स्थान है। हरित ऊर्जा से तात्पर्य सौर, पवन, नाभिकीय एवं जलविद्युत ऊर्जा से है।
- इसी प्रकार ग्रीन ग्रोथ इकोनॉमी में परिवहन के ऐसे साधनों का प्रयोग जरुरी है जिनसे कम से कम या न के बराबर कार्बन उत्सर्जन हो। उदाहरण के तौर पर सीएनजी चालित वाहनों, इलेक्ट्रिक वाहनों आदि को प्रोत्साहित किया जाना जरुरी है।
- हरित उद्योगों का विकास किया जाना चाहिए मसलन उद्योगों से निकलने वाले धुएँ को अत्याधुनिक चिमनियों से फिल्टर किया जाना चाहिए तथा जल का पुनर्शोधन करके उसका बार-बार उपयोग किया जाना चाहिए।
- शहरी आयोजना में इस प्रकार के घरों क निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जहाँ ऊर्जा का उपयोग कम से कम हो तथा अधिकांश जरुरत प्राकृतिक ऊर्जा से पूरी हो जाये।
- कृषि में भी हरित विधियों का प्रयोग किया जाना जरुरी है। उदाहरण के तौर पर कार्बनिक कृषि, सूक्ष्म सिंचाई विधियों, मृदा स्वास्थ्य कार्ड आदि का प्रयोग कर हरित कृषि को बढ़ावा दिया जा सकता है।
ग्रीन ग्रोथ इकोनॉमी क्यों आवश्यक है?
- धारणीय विकास अथवा सतत् विकास के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए ग्रीन ग्रोथ इकोनॉमी की आवश्यकता है।
- बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने तथा जलवायु परिवर्तन की समसया से निपटने के लिए ग्रीन ग्रोथ इकोनॉमी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ग्रीन ग्रोथ इकोनॉमी का सम्बंध पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए विकास के मार्ग पर अग्रसर होने से है। सतत् विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने एवं बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने में ग्रीन ग्रोथ इकोनॉमी की महत्वपूर्ण भूमिका है।