विश्व से गरीबी, असमानता, अन्याय को समाप्त करने तथा जलवायु परिवर्तन की समस्या के निराकरण के लिए सतत् विकास लक्ष्यों को अपनाया गया। इन सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सरकार, सिविल सोसायटी एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किस प्रकार के कदम उठाये जाने की आवश्यकता है?

सहस्त्रब्दी विकास लक्ष्यों की अवधि वर्ष 2015 में समाप्त हो गयी। इन सहस्त्रब्दी विकास लक्ष्यों के स्थान पर वर्ष 2015 से 2030 तक की अवधि के लिए सतत् विकास लक्ष्यों को अपनाया गया। इनका उद्देश्य गरीबी, असामानता एवं अन्याय को समाप्त करना तथा जलवायु परिवर्तन की समस्या को नियंत्रित करना है।

सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए यह आवश्यक है कि विभिन्न देशों के द्वारा सरकारी स्तर पर काम करने के साथ-साथ सिविल सोसायटी तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भी आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समन्वित प्रयासों की जरुरत है।

सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सरकारी के स्तर पर कार्य की भूमिकाः

  • सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सरकार के स्तर पर महत्वपूर्ण प्रयास किये जा सकते हैं। सरकारें गुड गवर्नेंस के माध्यम से तथा पारदर्शी एवं उत्तरदायी व्यवस्था स्थापित करके इन लक्ष्यों की प्राप्ति में अहम भूमिका अदा कर सकती हैं।
  • अंततरमंत्रलयी एवं अंतर्विभागीय सहयोग के साथ-साथ केन्द्र एवं राज्य सरकारों के मध्य सहयोग स्थापित कर इन लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ा जा सकता है।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजट आंवटन को बढ़ाकर तथा नीतियों को इन लक्ष्यों के अनुरुप बनाकर इनकी प्राप्ति के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सकता है।

सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सिविल सोसाइटी की भूमिकाः

  • सतत् विकास लक्ष्यों से जनता को अवगत कराने तथा इनके समुचित क्रियान्वयन में गैर सरकारी संगठन बहुत अहम भूमिका अदा कर सकते है। बड़े औद्योगिक घरानों तथा उद्योगपतियों के द्वारा कारपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत धन व्यय करके इन सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में अहम भूमिका अदा की जा सकती है।
  • दान आदि के द्वारा समय पर अपना आयकर जमा करके सिविल सोसाइटी सरकार की मदद कर सकता है ताकि सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के मार्ग में धन की कमी न पड़े।

सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में अंतर्राष्ट्रीय सहयोगः

  • विभिन्न देश आपसी सहयोग के द्वारा सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की ओर मजबूती से आगे बढ़ सकते हैं। उदाहरण के तौर विकसित देशों के द्वारा विकासशील देशों को तकनीकी एवं वित्तीय मदद प्रदान करके।
  • ग्रीन क्लाइमेट फंड तथा पेरिस समझौते के तहत बनी सहमति पर ईमानदारी पूर्वक अमल करके जलवायु परिवर्तन की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सतत् विकास लक्ष्य धारणीय विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनकी प्राप्ति के लिए सरकार के साथ सिविल सोसाइटी तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भी आवश्यकता है क्योंकि समन्वित प्रयासों से ही इनकी प्राप्ति संभव है।

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