हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय अधिकार समूह ऑक्सफैम के द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गयी है जिसमें विश्व में बढ़ रहे धन के असमान बँटवारे का उल्लेख किया गया हैा यह रिपोर्ट ‘रिवार्ड वर्क नॉट वेल्थ’ (Reward Work not Wealth) के नाम से जारी की गयी।
रिपोर्ट के शीर्षक ‘रिवार्ड वर्क नॉट वेल्थ’ से तात्पर्य यह है कि काम को पुरस्कृत किये जाने की जरुरत है न कि धन को। इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि जिस प्रकार से असमानता बढ़ती जा रही है उसे समाप्त या कम करना काफी कठिन कार्य होगा। सबसे बढ़कर इस रिपोर्ट में महिलाओं के साथ विभेद की बात भी सामने आती है ज्ञातव्य है कि रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत में प्रत्येक 10 अरबपतियों में 9 अरबपति पुरुष हैं।
धन के असमाना बँटवारे के सम्बंध में ऑक्सफैम के द्वारा जारी रिपोर्ट के निष्कर्षः
- वैश्विक स्तर पर पिछले वर्ष जितना धन सृजित किया गया उस सृजित धन का 82 प्रतिशत हिस्सा दुनिया की सबसे अमीर एक प्रतिशत आबादी के खाते में गया।
- यही स्थिति कमोबेश भारत में भी रही है। पिछले वर्ष कुल जितना धन सृजित हुआ उसका 73 प्रतिशत हिस्सा मात्र 1 प्रतिशत धनी भारतीयों के खाते में गया।
- पिछले वर्ष की रिपोर्ट में बताया गया था कि देश के एक प्रतिशत सबसे धनी लोगों के पास देश की कुल सम्पत्ति का 58 प्रतिशत हिस्सा है।
- इसके कारण पिछले एक वर्ष में ही एक प्रतिशत सर्वाधिक धनी लोगों की सम्पत्ति में 4.89 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुयी। यह 4.89 लाख करोड़ रुपये की राशि लगभग भारत के शिक्षा एवं स्वास्थ्य बजट की राशि के बराबर है।
- भारत में अरबपतियों की कुल सम्पत्ति तकरीबन 21 लाख करोड़ पहुँच गयी है जो देश के केन्द्रीय बजट के बराबर है।
- ऑक्सफैम की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निशा अग्रवाल के अनुसार अरबपतियों की बढ़ती संख्या अर्थव्यवस्था की मजबूती का नहीं बल्कि उसकी कमजोरी का साक्ष्य है। अमीर-गरीब के बीच विस्तृत होती यह खाई गरीबी एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है तथा लोकतंत्र को कमजोर बना रही है।
अमीरों एवं गरीबों के बीच बढ़ती असमानता को कम करने के लिए कौन से कदम जरुरी हैं?
- इस बढ़ती असमानता को कम करने के लिए ऐसे कदम उठाने होंगे जो समावेशी विकास को बढ़ावा देने वाले हों अर्थात समाज के सभी वर्गों को विकास का लाभ प्राप्त हो।
- किसानों के लिए आय के स्रोत बढ़ाने होंगे। ज्ञातव्य है कि वर्तमान में देश की तकरीबन आधी आबादी कृषि से आजीविका प्राप्त करती है।
- इसी प्रकार औद्योगिक श्रमिकों के हितों का ध्यान रखना होगा और उन्हे समुचित वेतन के साथ-साथ अन्य सामाजिक सुरक्षा सम्बंधी योजनाओं का लाभ प्रदान करना होगा।
- युवाओं को बेहतर शिक्षा एवं कौशल के साथ-साथ उपयुक्त रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए तभी भारत जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा उठा पायेगा।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि दुनिया के साथ-साथ भारत में आय की असमानता काफी तीव्र गति से बढ़ रही है जो नवीन समस्याओं को जन्म दे रही है। उपर्युक्त सुझावों पर अमल करके इस असमानता को कम किया जा सकता है।