हाल ही में स्विट्जरलैण्ड के दावोस शहर में विश्व आर्थिक फोरम की वार्षिक बैठक का आयोजन किया गया। विश्व आर्थिक पफोरम की इस बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री ने उद्घाटन भाषण दिया। तकरीबन 20 वर्षों के बाद इस मंच से किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने संबोधन किया।
ज्ञातव्य है कि वर्तमान भारतीय प्रधानमंत्री से पूर्व वर्ष 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री श्री एच.डी.देवीगौडा ने इस मंच से संबोधन किया था। वर्तमान भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा अपना 50 मिनट का पूरा भाषण हिंदी में दिया गया। इस दौरान उन्होने न सिर्फ न्यू इण्डिया की तस्वीर प्रस्तुत की बल्कि निवेश के बेहतरीन स्थल के रुप में भारत की जबरदस्त मार्केटिंग भी की। यही कारण हैं जिनके चलते प्रधानमंत्री के सम्बोधन को अनोखा माना जा रहा है।
भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा दुनिया के समक्ष किन तीन चुनौतियों का उल्लेख किया गया?
- भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा संरक्षणवाद को एक बड़ी चुनौती के रुप में प्रस्तुत किया गया। ज्ञातव्य है कि अमेरिका जैसे देश अमेरिकी उत्पाद, अमेरिकी कारोबार तथा अमेरिकी मूल के व्यक्यिों को वरीयता देकर संरक्षणवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।
- उन्होने आतंकवाद को दूसरी बड़ी चुनौती के रुप में प्रस्तुत किया। उन्होने स्पष्ट किया कि जितना खतरनाक आतंकवाद है उतना ही खतरनाक अच्छे एवं बुरे आतंकवाद में फर्क करना है।
- भारतीय प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन को तीसरी बड़ी चुनौती के रुप में प्रस्तुत किया। उन्होने स्पष्ट कि पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन निर्वाह करना भारतीय संस्कृति का अंग रहा है किंतु विकसित देशों औद्योगीकरण के लालच में पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँचा रहे हैं।
- भारतीय प्रधानमंत्री ने यह प्रश्न उठाया कि विकसित देश विकासशील देशों को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए कह रहे हैं किंतु ऐसे कितने देश हैं जो विकासशील देशों को समुचित संसाधन एवं तकनीकी उपलब्ध करा रहे हैं।
भारतीय प्रधानमंत्री ने नये एवं पुराने भारत के बीच अंतर किस प्रकार स्पष्ट किया?
- उन्होने स्पष्ट किया कि 20 वर्ष पूर्व भारतीय अर्थव्यस्था कमजोर थी किंतु वर्तमान में यह काफी सशक्त स्थिति में है। वर्ष 2025 तक यह पाँच लाख करोड़ डॉलर की हो जायेगी।
- पुराने भारत में निवेशकों के अनुकूल माहौल नहीं था किंतु वर्तमान सरकार ने निवेशकों के लिए रेड टेप समाप्त कर रेड कार्पेट बिछाने का कार्य किया है।
- आज का भारत तकनीकी को मजबूती से आत्मसात कर रहा है। बिग डाटा एवं आर्टिफिशिएल इंटेलीजेन्स के मामले में भारत तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है।
- नया भारत रिफॉर्म, परफॉर्म एवं ट्रांसफॉर्म के मार्ग पर अग्रसर है जहाँ पर्यटन, कारोबार एवं निवेश पहले की तुलना में काफी आसान हो चुका है।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि दावोस को विश्व आर्थिक फोरम को संबोधित कर एवं भारत की निवेशक अनुकूल छवि को प्रस्तुत कर निःसंदेह भारतीय प्रधानमंत्री ने प्रसंशनीय कार्य किया है। उन्होने विश्व के समक्ष उपस्थित तीन बड़ी चुनौतियों की ओर सभी देशों का ध्यान आकर्षित कर इनके निराकण के लिए मिलजुलकर आगे बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।