सतही ओजोन को क्षोभमण्डलीय ओजोन शशके रूप में जाना जाता है अर्थात् क्षोभमण्डल में पायी जाने वाली ओजोन को सतही ओजोन की संज्ञा दी जाती है। सतही ओजोन का निर्माण नाइट्रोजन ऑक्साइड की उपस्थिति में वीओसी , मीथेन एवं कार्बन मोनो आक्साइड के ऑक्सीकरण से होता है।
सतही ओजोन को पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य के लिए क्यों हानिकारक माना जाता है?
- सतही ओजोन पर्यावरण के लिए काफी हानिकारक है क्योंकि यह कुछ वनस्पतियों का समुल नाश करने में सक्षम है। इससे जैव विविधता के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
- यह भूमि में मौजूद नमी के लिए काफी खतरनाक है। भूमि में नमी के अभाव से उसकी उर्वरता में कमी आ सकती है। इससे खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- सतही ओजोन अन्य मौजूद जहरीले यौगिकों से मिलकर अधिक खतरनाक जहरीले यौगिकों का निर्माण कर सकती है।
- इसी प्रकार सतही ओजोन असामयिक मृत्यु, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस तथा अन्य श्वसन सम्बंधी बीमारियों को उत्पन्न करने की क्षमता रखती है। इससे स्पष्ट है कि यह मानव स्वास्थ्य को गंभीर रूप से हानि पहुँचाने की सामर्थ्य रखती है।
- मानव स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाने की क्षमता से युक्त होने के कारण यह लोगों के खर्च को बढ़ावा देती है जिससे वे आर्थिक नुकसान का सामना करते हैं।
- सबसे बढ़कर यह जनसांख्यिकीय लाभांश को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है क्योंकि जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा उसी स्थिति में लिया जा सकता है जब कार्यालय स्वस्थ हो।
सतही ओजोन को नियंत्रित करने के लिए किन कदमों को उठाये जाने की जरूरत है?
- कार्बनडाई आक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड तथा सल्फर डाई ऑक्साइड जैसे प्रदूषकों पर अधिक ध्यान दिया जाता है जबकि सतही ओजोन को नजरअंदाज किया जाता है। नीति नियंताओं को सतही ओजोन पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
- सतही ओजोन को मापने के लिए नवीन तकनीकी का विकास किया जाना चाहिए। भारत में प्रचलित वायु गुणवत्ता सूचकांक सतही ओजोन को मापने में सक्षम नहीं है।
- राष्ट्रीय स्तर पर दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ ओजोन क्षरण से सम्बंधित प्रदूषकों में नियंत्रण स्थापित किया जाना जरूरी है।
- सबसे बढ़कर पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित प्रतिबद्धता को लागू करके तथा नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों पर ध्यान देकर सतही ओजोन को नियंत्रित किया जा सकता है।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सतही ओजोन एक खतरनाक प्रदूषक है जो पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थय के लिए हानिकारक है। उपर्युक्त उपायों पर अमल करके इस पर समुचित नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।