हाल के समय में आधार कार्ड की जानकारी के लीक होने तथा उसके दुरूपयोग की कई शिकायतें सामने आयी हैं। इन शिकायतों के मद्दे नज़र भारतीय यूनीक पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के द्वारा आधार कार्ड की सुरक्षा के लिए दो स्तरीय व्यवस्था लागू की है। इस द्विस्तरीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषतायें क्या हैं?

हाल के समय में आधार कार्ड के डाटा की जानकारी लीक होने तथा उनके दुरूपयोग की कई घटनायें सामने आयी हैं। उदाहरण के तौर पर कई सरकारी वेबसाइटों पर बार-बार लोगों के आधार नम्बर के साथ-साथ उनके पते एवं फोन नम्बर को प्रदर्शित किया गया जिससे उनकी गोपनीयता भंग हुयी।

इसी प्रकार आधार कार्ड के डाटा के दुरूपयोग सम्बंधी घटनायें भी सामने आयी हैं। एयरटेल के द्वारा सिम के सत्यापन के लिए लोगों से उनका आधार नम्बर लिया गया किंतु बिना अपने ग्राहकों को सूचित किये उनके बैंक खाते खोल दिये गये। जब यह जानकारी सार्वजनिक हुयी तो भारतीय यूनीक पहचान प्राधिकरण ने जुर्माना लगाकर एयरटेल को दण्डित भी किया। यही कारण है कि आधार कार्ड से सम्बंधित जानकारी को सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय यूनीक पहचान प्राधिकरण के द्वारा एक दो स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गयी है।

आधार कार्ड की जानकारी को सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय यूनीक पहचान प्राधिकरण की दो स्तरीय प्रणालीः

आधार कार्ड से सम्बंधित जानकारी को सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय यूनीक पहचान प्राधिकरण के द्वारा वर्चुअल आईडी की शुरूआत की गयी है।यह वर्चुअल आईडी 16 अंकों की होगी जिसे कोई भी यूजर अपना आधर नम्बर इंटर करके भारतीय यूनीक पहचान प्राधिकरण की वेबसाइट से जनरेट कर सकेगा।

  • वह किसी भी कार्य के लिए अब अपने आधार नंबर के स्थान पर इस 16 अंकों वाली वर्चुअल आईडी का प्रयोग कर सकेगा।
  • ज्ञातव्य है कि वर्चुअल आईडी से आधार नंबर से सम्बंधित कोई भी जानकारी नहीं प्राप्त की जा सकेगी। इस प्रकार यदि यूजर के द्वारा किसी सरकारी या गैर सरकारी कार्य के लिए अपने आधार नंबर से सम्बंधित वर्चुअल आईडी का प्रयोग किया जाता है तो उसका दुरूपयोग नहीं किया जा सकेगा।
  • इसी प्रकार दूसरे स्तर पर भारतीय यूनीक पहचान प्राधिकरण के द्वारा सीमित केवाईसी (KYC) को लागू किया गया है।
  • इसके तहत प्रामाणिक यूजर एजेन्सियाँ बिना आधार नंबर जाने ई-केवाईसी की प्रक्रिया को पूरी कर सकेंगी।
  • इस प्रक्रिया को स्थानीय एवं वैश्विक प्रमाणिक यूजर  एजेन्सियों में विभाजित किया गया है। स्थानीय प्रामाणिक यूजर एजेन्सियाँ वर्चुअल आईडी के द्वारा भारतीय यूनीक पहचान प्राधिकरण से जानकारी प्राप्त कर प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगी।
  • जबकि वैश्विक प्रमाणिक यूजर एजेन्सियों को आधार नंबर एवं टोकन नंबर दोनों दिया जा सकेगा। इनके    आधार पर वे प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी करेंगी।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि आधार कार्ड से सम्बंधित जानकारी को सुरक्षित बनाने के संदर्भ में भारतीय यूनीक पहचान प्राधिकरण की दो स्तरीय सुरक्षा प्रणाली काफी बेहतर है। इससे निश्चित तौर जानकारी की गोपनीयता को बनाये रखने एवं सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

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