देश में आरक्षण विरोधी आन्दोलन तीव्र गति से उत्पन्न हो रहे हैं। इनके पीछे कौन से प्रमुख कारण हैं, स्पष्ट कीजिए? क्या देश की युवा आबादी को गुणक्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करके और कौशल प्रदान करके इस आरक्षण विरोधी मानसिकता को कम किया जा सकता है?

भारत में आरक्षण की शुरूआत देश के वंचित तबकों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के उद्देश्य से की गयी थी। निश्चित तौर पर आरक्षण से वंचित तबकों को कुछ लाभ जरूर हुआ है किंतु यह भी सच्चाई है कि इन वंचित वर्गों का एक छोटा हिस्सा ही बार बार आरक्षण का लाभ प्राप्त कर रहा है न कि समग्र वर्ग अतः आरक्षण अपने उद्देश्य को नहीं पूरा कर सका है।

हाल ही में प्रसिद्ध इतिहासकार रामचन्द्र गुहा ने कहा है कि भारत की आरक्षण नीति ने प्रश्नों का जवाब देने के स्थान पर प्रश्न उठाये है। आज देश भर में आरक्षण विरोधी आंदोलन चलाये जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ये आरक्षण विरोधी आंदोलन समाज की सशक्त जातियों के द्वारा चलाये जा रहे हैं। हरियाणा में जाट, गुजरात में पाटीदार तथा महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन इन्हीं आरक्षण विरोधी आंदोलनों के उदाहरण है। इनकी माँग या तो आरक्षण को समाप्त करने या फिर स्वयं को आरक्षण प्रदान करने की है।

क्या इसका समाधन गुणक्तापूर्ण शिक्षा एवं कौशल विकास में निहित है?

  • निश्चित तौर इस प्रकार की समस्याओं से रोजगार के नवीन अवसर सृजित कर और युवा आबादी को उसमें नियोजित करके बचा जा सकता है। युवा आबादी को रोजगार प्रदान करने के लिए सर्वप्रथम उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं कौशल से युक्त बनाना होगा।
  • सरकार को जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ प्राप्त करने के लिए क्षमता निर्माण में निवेश करना चाहिए।
  • मनरेगा जैसी योजनाओं से बेहतर लाभांश प्राप्त करने के लिए इनका प्रयोग युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में किया जाना चाहिए।
  • शैक्षिक कार्यक्रमों को परिणाम आधारित बनाया जाना चाहिए। ज्ञातव्य है कि वर्तमान में सिर्फ नामांकन बढ़ाने पर ही पूरा जोर दिया जाता है।
  • शारदा प्रसाद समिति की सिफारिशों को शीघ्रातिशीघ्र लागू किया जाना चाहिए। ज्ञातव्य है कि शारदा प्रसाद समिति ने मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की शुरूआत के लिए सिफारिश की थी।
  • यदि युवा आबादी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है और उन्हें वैश्विक स्तर का कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है तो निश्चित तौर पर उन्हें नियोजित करने में कोई समस्या नहीं आयेगी।
  • युवाओं को तकनीकी शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए ताकि वे सूचना-प्रौद्योगिकी वे इस युग में स्वयं को बेहतर ढंग से समायोजित कर सकें।
  • मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए ताकि भारत के कुशल इंजीनियरों एवं विशेषज्ञों को भारत से बाहर जाने से रोका जा सके। हमें ब्रेन ड्रेन पर नियंत्रण स्थापित कर ब्रेन गेन को प्रोत्साहित करना होगा।
  • साथ ही कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना होगा तथा व्यावसायिक कृषि के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना होगा। ज्ञातव्य है कि देश की तकरीबन आधी आबादी कृषि में संलग्न है और कृषि घाटे का पेशा बनी हुयी है।
  • सबसे बढ़कर विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाना होगा ताकि कृषि में संलग्न अतिरिक्त श्रम बल को कौशल विकास का प्रशिक्षण प्रदान करके उन्हें विनिर्माण क्षेत्र में नियोजित किया जा सके।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि आरक्षण विरोधी आंदोलनों के पीछे प्रमुख कारण रोजगार है। यदि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं कौशल विकास का प्रशिक्षण प्रदान कर देश के युवाओं को नियोजित किया जा सका तो निश्चित तौर पर इस प्रकार की स्थिति से निपटा जा सकता है।

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