सच्ची सत्यनिष्ठा से तात्पर्य हर प्रकार की स्थिति में ईमानदार बने रहने और सशक्त नैतिक सिद्धांतों से युक्त होने से है। यह एक आदर्श स्थिति है। ऐसी स्थिति में वास्तविक दुनिया में मनुष्य के कार्यों एवं उसकी नैतिक विचारधारा में कोई अंतर नहीं रह जाता है।
भारतीय संविधान के द्वारा सभी के लिए न्याय, समानता, स्वतंत्रता, बंधुता की स्थापना का प्रावधान किया गया है। इन सिद्धांतों को व्यवहारिकता में परिणत करने तथा समावेशी समाज की स्थापना में कार्यपालिका की अहम भूमिका होती है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कार्यपालिका में सत्यनिष्ठा का होना अति आवश्यक है।
भारतीय राजनीति एवं सार्वजनिक प्रशासन में सत्यनिष्ठा की भूमिका :
- भारतीय राजनीति में अपराधीकरण, घृणास्पद कथन, पार्टीवाद एवं असहिष्णुता बहुत तेजी से बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में सत्यनिष्ठा जैसे गुण का महत्व काफी बढ़ जाता है।
- इसी प्रकार सत्यनिष्ठा के गुण से युक्त प्रशासक ही अपने कर्तव्यों का ठीक प्रकार से बिना किसी पक्षपात या दबाव के कर सकता है।
- संविधान प्रदत्त आदर्शों की स्थापना के लिए सत्यनिष्ठ राजनेताओं एवं नौकरशाहों की आवश्यकता है।
- जब किसी विभाग में कोई भ्रष्ट मंत्री या नौकरशाह पहुंच जाता है तो वह सामाजिक, आर्थिक विकास को नकारात्मक रूप में प्रभावित करता है। यही कारण है कि सत्यनिष्ठा राजनीति एवं प्रशासन दोनों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।
- ऐसा अक्सर कहा जाता है कि सरकारी कर्मचारी कम वेतन के कारण भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं किंतु यह तथ्य सही नहीं है। वस्तुतः सत्यनिष्ठा जैसे मूल्य ही ईमानदारी का निर्धारण करते हैं न कि कम या अधिक वेतन।
- कानूनों के निर्माण तथा उनके क्रियान्वयन में सत्यनिष्ठा का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। सत्यनिष्ठ राजनेता ही प्रगतिशील कानूनों का निर्माण करवाते हैं और सत्यनिष्ठ नौकरशाह ही इन कानूनों का समूचित क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हैं।
- इसी प्रकार सत्यनिष्ठा न्यायिक प्रणाली के लिए भी अहम है। सत्यनिष्ठ न्यायाधीश ही बिना किसी पक्षपात के न्याय प्रदान कर सकता है।
- गवर्नेंस एवं कानून (Governance and the law) पर विश्व विकास रिपोर्ट 2017 के अनुसार सफल सुधारों को लागू करने के लिए विश्वसनीय प्रतिबद्धता की जरूरत होती है और यह विश्वसनीयय प्रतिबद्धता सच्ची सत्यनिष्ठा से ही आ सकती है।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सच्ची सत्यनिष्ठा से तात्यपर्य हर परिस्थिति में ईमानदार बने रहने से है। भारतीय राजनीति एवं प्रशासन जिस दौर से गुजर रहे हैं वहां सत्यनिष्ठा एक अपरिहार्य जरूरत है।