पर्यावरण के बिना किसी प्रकार का जीवन संभव नहीं हो सकता है, स्पष्ट कीजिए। किन नैतिक वजहों से हमें पर्यावरण को नष्ट करने का कोई अधिकार नहीं है?

यदि हम पर्यावरण को नष्ट कर देते हैं तो समाज का अस्तित्व संभव नहीं हो एसकता है। जीवन के लिए एवं इस विश्व के अस्तित्व के लिए पर्यावरण प्राथमिक एवं अपरिहार्य जरूरत है। यह तथ्य ‘ऑवर कॉमन फ्रयूचर’ (Our Common Future) नामक ब्रंटलैण्ड रिपोर्ट में बहुत गहराई से उल्लिखित किया गया है।

ज्ञातव्य है कि बढ़ते औद्योगकीकरण एवं शहरीकरण के चलते पर्यावरण का काफी अधिक नुकसान हुआ है। यह सत्य ही कहा गया है कि एक जंगल के स्थान पर मरूस्थल तैयार करना काफी आसान है। सबसे बढ़कर यदि इसी गति से पर्यावरण का विनाश जारी रहा तो संभवतः पृथ्वी के अस्तित्व के लिए भी संकट उत्पन्न हो सकता है। यही कारण है कि यह मानव का नैतिक दायित्व बनता है कि वह पर्यावरण को संरक्षित रखे।

किन नैतिक वजहों से हमें पर्यावरण को नष्ट करने का कोई अधिकार नहीं है?

  • नैतिकता का एक आधारभूत सिद्धांत है कि जिस चीज को निर्मित नहीं किया जा सकता उसे नष्ट करने का मनुष्य को कोई नैतिक आधार नहीं है।
  • गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार के अंतर्गत स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण को भी शामिल किया जाता है अतः पर्यावरण को संरक्षित रखना मनुष्य का दायित्व बनता है।
  • यदि पर्यावरण के प्रति असम्मान की भावना होगी तो वह कई प्रकार से मानव समुदाय को हानि पहुंचा सकती है। उदाहरण के तौर पर वनाग्नि, बाढ़ एवं भू-स्खलन जैसी समस्यायें सामने आ सकती है।
  • पर्यावरण में मौजूद वनस्पतियों को सजीव माना जाता है। यह तथ्य वैज्ञानिक शोधों में प्रमाणित किया जा चुका है। यदि इन सजीव वनस्पतियों को हानि पहुंचायी जाती है। तो यह नैतिकता के विरुद्ध होगा।
  • जंगलों को नष्ट कर हम उन आदिवासी समुदायों की भावनाओं को आहत करते हैं जो इन जंगलों को भगवान मानते हैं।
  • सबसे बढ़कर जैवविविधता के संरक्षण तथा सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण संरक्षण बहुत आवश्यक है।
  • इसी प्रकार हमें यह बात हमेशा स्मरण रखनी होगी कि पर्यावरण को हमने अपने पूर्वजों से जिस रूप में प्राप्त किया है उसी रूप में इसे हमारे द्वारा आगामी पीढ़ियों को भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि मानव एवं पृथ्वी के अस्तित्व के लिए पर्यावरण का संरक्षण अनिवार्य है। सबसे बढ़कर अनेक नैतिक वजहों से यह सिद्ध किया जा सकता है कि पर्यावरण को संरक्षित रखना मनुष्य का दायित्व है।

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