प्रस्तुत मामला दया, सहानुभूति एवं करूणा से सम्बंधित होने के साथ-साथ विवेक एवं सूझबूझ से भी सम्बंधित है। अतः इस मामले को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है।
- प्रस्तुत मामले के सम्बंध में मेरे समक्ष निम्न विकल्प उपलब्ध हैं-
- उस लड़की को बटुआ छीनकर भाग जाने देना और उसके विरूद्ध कोई कार्यवाही न करना।
- उस लड़की को पकड़कर पिटाई करना और पुलिस के हवाले कर देना।
- उस लड़की को सुरक्षित रूप से अपनी कस्टडी में लेना और उसकी समस्या के बारे में जानकारी प्राप्त कर पूर्ण समाधन करने का प्रयास करना।
उपर्युक्त तीनों विकल्पों का समुचित मूल्यांकनः
प्रथम विकल्प का मूल्यांकन- यदि उस लड़की को बटुआ छीनकर भाग जाने दिया जाता है तो यह एक गलत परम्परा होगी। दोषी को समुचित दण्ड दिया जाना जरूरी है अन्यथा वह बार-बार ऐसी ही कार्यवाही करेगा। इससे भविष्य में कानून एवं व्यवस्था के लिए बड़ी समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
सबसे बढ़कर दया दिखाना एवं जरूरतमंद की मदद करना उचित है किंतु यह दया एवं मदद सही दिशा में होनी चाहिए अन्यथा जरूरतमंद को अपराधी बनने में अधिक समय नहीं लगता है। इस प्रकार प्रथम विकल्प नैतिकता एवं कानून दोनों रूपों में गलत होगा।
द्वितीय विकल्प का मूल्यांकनः
दोषी को सजा देना आम जनता का कार्य नहीं है। सजा देने का कार्य कानून सम्मत तरीके से ही किया जाना चाहिए। यदि आम जनता ही सजा का निर्णय करने लगेगी तो लोकतंत्र भीड़तंत्र में बदल जायेगा। इसलिए उस लड़की को पीटना गलत होगा। हाँ पुलिस के हवाले उसे किया जा सकता है।
तृतीय विकल्प का मूल्यांकनः
किसी भी समस्या के निदान के लिए उसके पीछे छिपे कारणों को जानना जरूरी है। उस लड़की से मिलकर एवं उससे बात कर उसकी प्रमुख समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है और समुचित निदान प्रस्तुत किया जा सकता है।
मेरे द्वारा चुना गया विकल्प एवं उसके कारणः
इस समस्या के संदर्भ में मेरे द्वारा तीसरे विकल्प का चयन किया जायेगा। तीसरे विकल्प से समस्या के तह तक जाया जा सकता है और उसका निदान किया जा सकता है।
समस्या का निदानः
- सर्वप्रथम मैं अपनी गाड़ी को किनारे खड़ी करूँगा ताकि ट्रेफिक जाम की समस्या न उत्पन्न हो।
- इसके बाद उस लड़की से प्रेमपूर्वक उसकी समस्या पूछनी होगी। यदि उसके साथ नम्र व्यवहार किया जायेगा तो बिना भय के वह सारी परिस्थिति स्पष्ट रूप से बता देगी।
- यदि उसकी समस्या उचित लगती है तो उसे किसी आश्रय स्थल में स्थान दिलाने का प्रयास किया जायेगा।
- आश्रय स्थल ऐसा होना चाहिए जहाँ उसकी शिक्षा आदि का समुचित प्रबंध हो ताकि उसके व्यक्तित्व का विकास हो सके और वह सक्षम बन सके।
- उसे आश्रय स्थल में भेजने के पश्चात मैं समय-समय पर उससे मिलता रहूँगा और उसे सही रास्ते पर आगे बढ़ने की शिक्षा देता रहूँगा तथा यथासंभव मदद भी करता रहूँगा।
इस प्रकार दया एवं करूणा के साथ विवेक का प्रयोग है जो अपराध की ओर उन्मुख हो सकती थी।