यह समस्या कानून एवं व्यवस्था से तो जुड़ी ही है साथ ही संवेदनशीलता एवं सूझबूझ से भी संबंधित है। एक ओर जहाँ नक्सलवाद की चुनौती है वहीं पुलिसकर्मियों के परिवारवालों की संवेदना तथा उनको सुरक्षित बचाने का दबाव है।
ऐसी स्थिति में निम्नलिखित विकल्प उपलब्ध हैं?
- अपहर्ता नक्सलवादियों की बात मान ली जाये तथा नक्सली नेता को छोड़कर पुलिसकर्मियों को बचा लिया जाये।
- नक्सलवादियों के समक्ष पुनः एक बार बातचीत का प्रस्ताव रखकर समस्या को सुलझाने का प्रयास किया जाये।
- नक्सवादियों की माँग ठुकराकर उनके विरूद्ध कानून सम्मत कार्यवाही की जाये।
प्रथम विकल्प का मूल्यांकनः
प्रथम विकल्प सर्वाधिक आसान है क्योंकि यदि दोनों पक्ष एक-दूसरे की बात मान लेते हैं तो समस्या बड़ी आसानी से सुलझ जायेगी। किंतु इससे नक्सलवादियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा वे भविष्य में भी इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम देकर अपनी गलत माँगे मानने का प्रशासन पर दबाव डालेंगे।
इस प्रकार प्रथम विकल्प का चयन उचित नहीं होगा।
द्वितीय विकल्प का मूल्यांकनः
नक्सलवादियों के समक्ष एक बार पुनः बातचीत का प्रस्ताव रखा जाना उचित होगा। उन्हें बताना होगा कि यदि वे हिंसा छोड़कर कानून की शरण में आते हैं तो सरकार उनके साथ उदारता का व्यवहार करेगी। सरकार के द्वारा उनके रोजगार एवं पुनर्वास की पूरी व्यवस्था की जायेगी। यह विकल्प उचित है किंतु चूँकि नक्सलवादी अपनी माँग पर अडिग हैं अतः बहुत कम संभावना बनती है कि वे आपकी माँग मान लें।
तृतीय विकल्प का मूल्यांकनः
उपर्युक्त दोनों विकल्पों की अस्वीकृत की स्थिति में तीसरे विकल्प का चयन करना होगा। यह तीसरा विकल्प नक्सलवादियों की नाजायज मांग को ठुकराकर उनके विरूद्ध कानून सम्मत कार्यवाही से सम्बंधित है।
मेरे द्वारा चुना गया विकल्पः
इस स्थिति में मेरे द्वारा तीसरे विकल्प का चयन किया जायेगा तथा एक विशेष टीम बनाकर नक्सलवादियों के सफाये तथा अपहृत पुलिसकर्मियों को छुड़ाने की व्यवस्था की जायेगी।
मेरे द्वारा की गयी कार्यवाही का क्रमः
मेरे द्वारा सर्वप्रथम एक विशेष टीम का गठन किया जायेगा जिसे अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्रों के साथ बुलेट प्रूफ वस्त्रों से लैश किया जायेगा।
- इसके पश्चात् पूरी टीम को दो हिस्सों में बाँट दिया जायेगा। टीम का एक हिस्सा नक्सलवादियों के विरूद्ध घेरा बनायेगा तथा दूसरा हिस्सा अपना पूरा ध्यान अपहृत पुलसकर्मियों पर केन्द्रित करेगा।
- टीम का जो हिस्सा नक्सलवादियों को घेरे में लेगा वह उन्हें अपने साथ पूरी तरह से उलझा कर रखेगा और लगातार फायरिंग जारी रखेगा।
- इसी बीच टीम का दूसरा हिस्सा मौका पाकर अपहृत पुलिसकर्मियों को छुड़ाने का कार्य पूरा कर लेगा।
इस प्रकार साहस, सूझबूझ एवं बहादुरी से इस समस्या को हल किया जा सकेगा।