सन्धि-2

स्वर सन्धि के प्रकार-

               स्वर सन्धि पाँच प्रकार के होते है-

(क)    ह्रस्व या दीर्घ स्वर सन्धि

(ख)    गुण-सन्धि

(ग)    वृद्धि-सन्धि

(घ)    यण-सन्धि

(ड.)    अयादि-सन्धि

नोट: आ, ई, ऊ को ‘दीर्घ’ ए, ओ, अर ‘गुण’, ऐ, औ को ‘वृद्धि’, य, र, ल, व को ‘यण्’ एवं अय, आय, अव, आव .... को ‘अयादि’ (अय+आदि) कहते हैं।

(क)    दीर्घ स्वर सन्धि या ह्रस्व स्वर सन्धि-(सूत्र-अकः सवर्णे दीर्घः) -जब दो सवर्ण स्वरों के मिलने से उनका रूप दीर्घ हो जाता है, इसे दीर्घ स्वर कहते हैं। ह्रस्व या दीर्घ ‘अ, इ, उ, ऋ के पश्चात् क्रमशः ह्रस्व या दीर्घ ‘अ, इ, उ, ऋ’ स्वर आए तो दोनों को मिलाकर दीर्घ ‘आ, ई, ऊ, ऋ’ हो जाता है; जैसे-

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धर्म+अर्थ = धर्मार्थ

स्व+अर्थी = स्वार्थी

देव + अर्चन = देवार्चन

वीर+अंगना = वीरांगना

मत+अनुसार= मतानुसार

पुस्तक+अर्थी= पुस्तकार्थी

परम+अर्थ= परमार्थ

राम+अनुचर = रामानुचर

देव+अधिपति= देवाधिपति

राम+अयन= रामायण

कल्प+अन्त= कल्पान्त

अस्त+अचल= अस्ताचल

गीत=अंजलि= गीतांजलि

दिवस+अन्त= दिवसान्त

अ+=

परम+आत्मा= परमात्मा

शुभ+आगमन = शुभागमन

शिव+आलय = शिवालय

देव+आलय = देवालय

नव+आगत = नवागत

सत्य+आग्रह = सत्याग्रह

रत्न+आकर = रत्नाकर

कुश+शासन = कुशासन

आम+आशय = आमाशय

भय+आकुल = भयाकुल

देव+आगमन = देवागमन

हिम+आलय = हिमालय

गुण+आलय = गुणालय

आ+ =

सेवा+अर्थ = सेवार्थ

विद्या+अभ्यास = विद्याभ्यास

कदा+अपि = कदापि

परीक्षा+अर्थी = परीक्षार्थी

सीमा+अंत = सीमान्त

युवा+अवस्था = युवास्था

विद्या+अर्थी = विद्यार्थी

तथा+अपि = तथापि

पुरा+अवशेष = पुरावशेष

दिशा+अन्तर = दिशान्तर

रेखा+अंश = रेखांश

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