सन्धि-4

उ + =

लघु + ऊर्मि =  लघूर्मि

धातु + ऊष्मा = धातूष्मा

सिन्धु + ऊर्मि = सिन्धूर्मि

साधु + ऊर्जा = साधूर्जा

मंजु + ऊषा = मंजूषा

ऊ + =

वधू + उत्सव = वधूत्सव

भू + उत्सर्ग = भूत्सर्ग

वधू + उपकार = वधूपकार

भू + उद्धार = भूद्धार

वधू + उर्मि = वधूर्मि

भू + उपरि = भूपरि

ऊ + = ऊ 

सरयू + ऊर्मि = सरयूर्मि

भू + ऊष्मा = भूष्मा

वधू + ऊर्मि = वधूर्मि

भू + ऊर्जा = भूर्जा

भू + ऊध्र्व = भूध्र्व

ऋ + = ऋ  

पितृ + ऋण = पितृण

होतृ + ऋकार = होतृकार

होतृ + ऋकारः = होतृकारः

मातृ + ऋणम् = मातृणम्

2.            गुण सन्धि - (आद्गुणः अथवा आदेड्गुणः)  यदि अ, आ के बाद इ या ई रहे तो दोनो मिलकर ए; उ या ऊ रहे तो दोनो मिलकर ‘ओ’; ऋ रहे तो दोनो मिलकर अर् हो जाता है। इसे गुण सन्धि कहते है।

अ+=

नर + इन्द्र = नरेन्द्र

सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र

पुष्प + इन्द्र = पुष्पेन्द्र

देव + इन्द्र = देवेन्द्र

बाल + इन्दु = बालेन्दु

मृग + इन्द्र = मृगेन्द्र

सत्य + इन्द्र = सत्येन्द्र

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