उ + ऊ = ऊ
लघु + ऊर्मि = लघूर्मि
धातु + ऊष्मा = धातूष्मा
सिन्धु + ऊर्मि = सिन्धूर्मि
साधु + ऊर्जा = साधूर्जा
मंजु + ऊषा = मंजूषा
ऊ + उ = ऊ
वधू + उत्सव = वधूत्सव
भू + उत्सर्ग = भूत्सर्ग
वधू + उपकार = वधूपकार
भू + उद्धार = भूद्धार
वधू + उर्मि = वधूर्मि
भू + उपरि = भूपरि
ऊ + ऊ = ऊ
सरयू + ऊर्मि = सरयूर्मि
भू + ऊष्मा = भूष्मा
वधू + ऊर्मि = वधूर्मि
भू + ऊर्जा = भूर्जा
भू + ऊध्र्व = भूध्र्व
ऋ + ऋ = ऋ
पितृ + ऋण = पितृण
होतृ + ऋकार = होतृकार
होतृ + ऋकारः = होतृकारः
मातृ + ऋणम् = मातृणम्
2. गुण सन्धि - (आद्गुणः अथवा आदेड्गुणः) यदि अ, आ के बाद इ या ई रहे तो दोनो मिलकर ए; उ या ऊ रहे तो दोनो मिलकर ‘ओ’; ऋ रहे तो दोनो मिलकर अर् हो जाता है। इसे गुण सन्धि कहते है।
अ+इ = ए
नर + इन्द्र = नरेन्द्र
सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र
पुष्प + इन्द्र = पुष्पेन्द्र
देव + इन्द्र = देवेन्द्र
बाल + इन्दु = बालेन्दु
मृग + इन्द्र = मृगेन्द्र
सत्य + इन्द्र = सत्येन्द्र