सन्धि-6

अ+ = अर्

सप्त + ऋषि = सप्तर्षि

ब्रह्म + ऋषि = ब्रह्मर्षि

देव + ऋषि = देवर्षि

राज + ऋषि = राजर्षि

आ+ = अर्

महा + ऋषि = महर्षि

वृद्धि सन्धि - ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘ए’ या ‘ऐ’ आए तो दोनों के मेल से ‘ऐ’ हो जाता है तथा ‘अ’ और ‘आ’ के पश्चात् ‘ओ’, ‘औ’ आये तो दोनो के मेल से ‘औ’ हो जाता है; जैसे-

अ+=

एक+एक = एकैक

लोक + एषणा = लोकैषणा

एक+एव = एकैव

तत्र + एव = तत्रैव

अ+=

मत+ऐक्य = मतैक्य

धन+ऐश्वर्य= धनैश्वर्य

धर्म+ऐक्य = धर्मैक्य 

आ+=

सदा+एव= सदैव

सर्वदा+एव= सर्वदैव

तथा+एव= तथैव

एकदा+एव= एकदैव

आ+=

महा+ऐश्वर्य= महैश्वर्य

रमा+ऐश्वर्य= रमैश्वर्य

अ+=

उष्ण+ओदन= उष्णौदन

वन+औषधि= वनौषधि

जल+ओक= जलौक

जल+ओध= जलौध

दंत+ओष्ठ= दंतोष्ठ

अ+=

वन+औषध= वनौषध

परम+औषध= परमौषध

परम+औदार्य=परमौदार्य

आ+=

महा+ओज= महौज

महा+ओजस्वी= महौजस्वी

गंगा+औषधि= गंगौषधि

आ+=

महा+औषध= महौषध

महा+औदार्य= महौदार्य

यण सन्धि - (सूत्र-इकोयणचि) यदि ‘इ’, ‘ई’, ‘उ’, ‘ऊ’, ‘ऋ’ और ‘लृ’ के बाद भिन्न स्वर आए तो ‘इ’ और ‘ई’ का ‘य’, ‘उ’ और ‘ऊ’ का ‘व’ तथा ‘ऋ’ का ‘र’ और ‘लृ’ का ल हो जाता है।

इ+=

अति+अधिक= अत्यधिक

यदि+अपि= यद्यपि

सति+अपि= सत्यपि

प्रति+अन्तर= प्रत्यन्तर

प्रति+अर्पण= प्रत्यर्पण
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