ऋ + अ = र
पितृ + अनुमति = पित्रनुमति
मातृ + अर्थ = मात्रर्थ
ऋ + आ = रा
मातृ + आज्ञा = मात्राज्ञा
मातृ + आनन्द = मात्रानन्द
पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
पितृ + आदेशः = पित्रादेशः
ऋ + इ = रि
मातृ + इच्छा = मात्रिच्छा
पितृ + इच्छा = पित्रिच्छा
अयादि सन्धि: (सूत्र- एचोऽयवायावः) - यदि ‘ए’, ‘ऐ’, ‘ओ’, ‘औ’ स्वरों का मेल दूसरे स्वरों से हो तो ‘ए’ का ‘अय’, ‘ऐ’ का ‘आय’ ‘ओ’ का ‘अव’ तथा ‘औ’ का ‘आव’ के रूप में परिवर्तन हो जाता है; जैसे-
ए + अ = अय
ने + अन = नयन
शे + अन = शयन
ऐ + अ = आय
नै + अक = नायक
गै + अक = गायक
गै + अन = गायन
विधै + अक = विधायक
विनै + अक = विनायक
ऐ + इ = आयि
नै + इका = नायिका
गै + इका = गायिका
ओ + अ = अव
पो + अन = पवन
भो + अन = भवन
श्रो + अन = श्रवण
भो + अति = भवति
ओ + इ = अवि
पो + इत्र = पवित्र
गो + इनि = गविनि
ओ = ई = अवी
गो + ईश = गवीश
नो + ईश = नवीश