सन्धि-10

ट् का ड होना-

षट् + आनन = षडानन

षट् + रिपु = षड्रिपु

त् का द होना-

जगत् + ईश = जगदीश

तत् + रूप = तद्रूप

भगवत् + भजन = भगवद्भजन

उत् + योग = उद्योग

सत् + भावना = सद्भावना

सत् + गुण = सद्गुण

तत् + इच्छा = तदिच्छा

सत् + गति = सद्गति

सत् + आचार = सदाचार

भगवत् + भक्ति = भगवद्भक्ति

वृहत् + रथ = वृहद्रथ

सत् + आनन्द = सदानन्द

प् का ब होना-

अप् + ज = अब्ज

अप् + धि = अब्दि

सुप+ अंत = सुबंत 

2.            वर्ग के पहले वर्ण का पाँचवें वर्ण में परिवर्तन - यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) का मेल किसी अनुनासिक वर्ण (वस्तुतः न, म) से हो तो उसके स्थान पर उसी वर्ग का पाँचवा वर्ण (ड., ञ, ण, न, म) हो जाता है; जैसे-

वाक् + मय = वाड्.मय

षट् + मुख = षण्मुख।

उत् + मत्त = उन्मत्त

तत् + मय = तन्मय

चित् + मय = चिन्मय

जगत् + नाथ = जगन्नाथ

अप् + मय = अम्मय

षट् + मास = षण्मास

वाक् + मात्र = वाड्.मात्र

दिक् + मण्डल = दिड्.मण्डल

एतत् + मुरारी = एतन्मुरारी

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