जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक परिघटना है। इसके प्रभाव से कोई भी देश सुरक्षित नहीं है। अमेरिका जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देश भी जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चरम मौसमी घटनाओं का सामना कर रहे हैं। हाल ही में उत्तरी अमेरिका को बॉम्ब चक्रवात तथा पोलर वोर्टेक्स जैसी चरम मौसमी घटनाओं का सामना करना पड़ा।
इन सबके बावजूद भी जलवायु परिवर्तन के सम्बंध में आम सहमति बनती नहीं दिख रही है। इसका कारण यह कि विकसित देश अपनी अत्यधिक खपत वाली भौतिकतावादी जीवन शैली में कटौती करने के लिए तैयार नहीं हैं। जलवायु परिवर्तन की समस्या वैसे तो सभी वर्गो को प्रभावित कर रही है किंतु विकासशील देशों की गरीब आबादी पर इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है।
जलवायु परिवर्तन की समस्या वैश्विक स्तर पर जनजातीय समुदाय को किस प्रकार प्रभावित कर रही है ?
- जनजातीय समुदाय जलवायु परिवर्तन की समस्या से काफी गंभीर रूप में प्रभावित हुआ है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को निम्न प्रकार से समझ सकते हैं-
- जनजातीय समुदायों की सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियाँ प्रकृति से बहुत ही करीब से जुड़ी होती हैं। इस प्रकार प्रकृति में आया परिवर्तन उन्हे काफी गंभीरता से प्रभावित करता है। ज्ञातव्य है कि जलवायु परिवर्तन चरम मौसमी घअनाओं को जन्म देकर प्रकृति एवं पर्यावरण को विपरीत रूप से प्रभावित कर रहा है।
- समुद्र के किनारे एवं द्वीपों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के समक्ष अस्तित्व एवं आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। ज्ञातव्य है कि जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री जल स्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है।
- जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न प्रभावों से कुछ जनजातीय समुदाय विलुप्ति के कगार पर पहुँच चुके हैं। उदाहरण के तौर पर ग्लेशियरों के पिघलने से आर्कटिक जनजाति के निवास स्थल को खतरा उत्पन्न हो गया है।
- जलवायु परिवर्तन की गंभीर होती समस्या के मद्देनजर सरकार के द्वारा झूम कृषि पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। इसके कारण उन जनजातियों के समक्ष खतरा उत्पन्न हो गया है जो झूम कृषि पर आश्रित हैं।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन वैश्विक स्तर पर सभी वर्गों को गंभीरता से प्रभावित कर रहा है। इसका सर्वाधिक दुप्रभाव गरीब, वंचित आदिवासी समुदाय पर पड़ रहा है।