ठोस कचरे का समुचित प्रबंधन शहरी क्षेत्रों में बड़ी समस्या बनकर उभरा है, स्पष्ट कीजिए। ठोंस कचरा मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण के लिए किस प्रकार हानिकारक है? साथ ही बताइए कि ठोस कचरे का समुचित निपटान किस प्रकार किया जाना चाहिए ताकि मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।

ठोस कचरे से तात्पर्य ऐसे ठोस पदार्थों से होता है जो अवांछित एवं बेकार होते हैं तथा इनकी उत्पत्ति आवासीय, औघोगिक एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियों के फलस्वरूप होती है। 2008 के उपलब्ध आकड़ो के अनुसार शहरी भारत में प्रतिवर्ष 68.8 मिलियन टन ठोंस कचरा प्रतिवर्ष एकत्रित होता है। 

यह ठोस कचरा न सिर्फ मानव स्वास्थ्य को गंभीरता से प्रभावित करता है बल्कि पर्यावरण को भी क्षति पहुँचाता है। सबसे बढ़कर ठोस कचरा विभिन्न रूप में जलवायु परिवर्तन की समस्या को भी बढ़ाने का कार्य करता है।

ठोस कचरा मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए किस प्रकार हानिकारक है ?

  • ठोस कचरे में कई प्रकार के हानिकारक जीवाणु पनपते हैं जो पानी एवं भोजन के माध्यम से खाद्य श्रंखला में पहुँचते हैं। इनका उपयोग करने वाले मनुष्य कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करते हैं।
  • ठोस कचरे में कई विषाक्त रसायन एवं धातुएं पायी जाती हैं जो मानव स्वास्थ्य को विपरीत रूप में प्रभावित करती हैं।
  • ठोस कचरे को जलाने से कई विषाक्त गैसें उत्पन्न होती हैं जो तापमान को बढ़ाती हैं और ग्लोबल वार्मिंग में योगदान करती हैं।

ठोस कचरे का समुचित निपटान किस प्रकार किया जाना चाहिए ?

  • ठोस कचरे के जैविक रूप से अपक्षयित होने वाले हिस्से को वर्मी कम्पोस्ट में बदलकर कृषि  कार्यों में प्रयुक्त किया जाना चाहिए।
  • इसी प्रकार ठोस कचरे से पुनर्चक्रित (Recycled) हिस्से को अलग कर उसका पुनर्चक्रण (Recycling) किया जाना चाहिए। ज्ञातव्य है कि नये पदार्थों के उत्पादन की तुलना में पुनर्चक्रित उत्पादों  में काफी कम ऊर्जा की खपत होती है।
  • प्लास्टिक जैसे पदार्थ जो जैविक रूप से अपक्षयित नहीं होते हैं, उनका प्रयोग सड़क बनाने में किया जा सकता है।
  • कचरे के स्त्रोत से ही ठोस कचरे को अलग-अलग करके उसका ट्रीटमेंट किया जाना चाहिए। उदाहरण के तौर पर इजरायल में ठोस कचरे के समुचित प्रबंधन के लिए कचरा क्रांति कार्यक्रम (Waste Revolution Programme) संचालित किया जा रहा है।
  • विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार कचरे को भूमि में दबाने (Land Filling) से 5 प्रतिशत कार्बन डाई ऑक्साइड तथा 12 प्रतिशत मीथेन (ठोस कचरे के अनुपात में) उत्पन्न होती है। यही कारण है कि ठोस कचरे का समुचित प्रबंधन किया जाना चाहिए न कि उसे भूमि के नीचे दबाया जाना चाहिए।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि  ठोस कचरा शहरी क्षेत्रों में एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। यह मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनो के लिए हानिकारक है अतः इसका समुचित निपटान बहुत आवश्यक है।
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