नीति आयोग के द्वारा 17 फरवरी 2018 को हेल्दी स्टेट्स एण्ड प्रोग्रेसिव इंडिया रिपोर्ट (Healthy States and Progressive India Report) जारी की गयी है। इस रिपोर्ट में देश के राज्यों में जन्म के समय लिंगानुपात की स्थिति का उल्लेख किया गया है।
उल्लेखनीय है कि लिंगानुपात से तात्पर्य किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में प्रति एक हजार पुरूषों के पीछे महिलाओं की संख्या से है। जबकि जन्म के समय लिंगानुपात एक महत्वपूर्ण सूचकांक है जिससे ज्ञात होता है कि कन्या भ्रूण हत्या अर्थात् लिंग चयन गर्भपात कराने में कितनी कमी आयी है।
नीति आयोग के द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार देश में लिंगानुपात की स्थिति :
- इस रिपोर्ट के अनुसार देश के 21 बड़े राज्यों में से 17 राज्यों में जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at birth) में कमी आयी है।
- सर्वाधिक गिरावट गुजरात में आयी है। जहाँ गुजरात में पहले 1000 लड़कों पर 907 लड़कियाँ पैदा होती थी वहीं अब यह संख्या घटकर 854 रह गयी है अर्थात् गुजरात में सीधे 53 अंकों की गिरावट आयी है।
- गुजरात के बाद क्रमशः हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखण्ड, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं कर्नाटक का स्थान आता है।
- हरियाणा में 35 अंकों की गिरावट दर्ज की गयी है जबकि राजस्थान में 32 अंक, उत्तराखण्ड में 27 अंक, महाराष्ट्र में 18 अंक, हिमाचल प्रदेश में 14 अंक, छत्तीसगढ़ में 12 अंक तथा कर्नाटक में 11 अंकों की गिरावट आयी है।
- इस रिपोर्ट के अनुसार उ.प्र., पंजाब तथा बिहार में जन्म के समय लिंगानुपात की स्थिति में सुधार आया है।
- पंजाब में 19 अंकों की वृद्धि दर्ज की गयी है जबकि उ.प्र. में 10 एवं बिहार में 9 अंकों की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है।
- नीति आयोग ने इस रिपोर्ट के लिए 2012-14 को आधार वर्ष बनाया था। नीति आयोग ने इस स्थिति में सुधार के लिए पीसीपीएनडीटी (PCPANDT) अधिनियम 1994 को सख्ती से लागू करने की बात कही।
बालिका भ्रूण हत्या को नियंत्रित करने के लिए देश में मौजूद कानूनी प्रावधान
- बालिका भ्रूण हत्या को रोकने के लिए वर्ष 1994 में पीसीपीएनडीटी अधिनियम (Pre-Conception and Prenatal Diagnostic techniques, Act) गर्भाधान पूर्व एवं प्रसूति पूर्व निदान तकनीकी का प्रयोग करके लिंग चयन एवं गर्भापात को रोकना है।
- आगे वर्ष 2003 में इसे संशोधित किया गया ताकि लिंग चयन में प्रयोग की जाने वाली तकनीकी को बेहतर ढंग से विनियमित किया जा सके।
निष्कर्षतः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि नीति आयोग की वर्तमान रिपार्ट देश में जन्म के समय लिंगानुपात की दयनीय स्थिति का उल्लेख करती है। इस स्थिति में सुधार लाया जाना जरूरी है। उपर्युक्त अधिनियम को बेहतर ढंग से लागू करके इस स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है।