हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिये गये उस निर्णय का उल्लेख कीजिए जिसके तहत उसने स्पष्ट किया है कि दो बालिगों के मध्य विवाह की स्थिति में कोई तीसरा दखल नहीं दे सकता है। देश में ऑनर किलिंग की बढ़ती समस्या एवं खाप पंचायतों को नियंत्रित करने में यह निर्णय किस प्रकार मददगार होगा ?

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो वयस्कों के द्वारा आपसी रजामंदी से विवाह करने के अधिकार को मान्यता प्रदान की गयी है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि दो वयस्क आपसी सहमति से विवाह करते हैं तो कोई तीसरा उन्हे नहीं रोक सकता है।

उल्लेखनीय है कि यह अधिकार पहले से ही संविधान के द्वारा प्रदान किया जा चुका है किंतु व्यवहारिक तौर पर इसे लागू करने में कई प्रकार की समस्यायें हैं। संविधान में अनुच्छेद 21 में स्पष्टतः उल्लिखित है कि यदि कोई व्यक्ति जो वयस्क है किसी भिन्न जाति या समुदाय के व्यक्ति से विवाहित होना चाहता है तो उसके अथवा उसकी माता-पिता उसे वैधानिक रूप से नहीं रोक सकते । ऐसा किया जाना परेशान करना अथवा दुर्व्यहार किया जाना होगा।

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ ने सुनाया। उन्होने यह भी स्पष्ट किया कि वयस्क जोड़ों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए और सकुशल उनका विवाह कराने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया जायेगा।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय ऑनर किलिंग एंव खाप पंचायतों को नियंत्रित करने में किस प्रकार सहायक होगा ?

  • देश में ऑनर किलिंग की घटनायें लगातार घटित हो रही हैं। यह सिलसिला मनोज - बबली हत्याकांड से शुरू हुआ तथा आज भी बदस्तूर जारी है। अभी  हाल ही में दिल्ली में अंकित सक्सेना नामक युवक की हत्या कर दी गयी ।
  • ऑनर किलिंग और प्रेमी युगलों के विरूद्ध की जाने वाली कार्यवाही पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए खाप पंचायतों से कहा कि वे समाज के ठेकेदार न बने। इस सम्बंध में जो भी कार्यवाही होगी वह कानून के मुताबिक होगी।
  • जब खाप पंचायतों की ओर से प्रस्तुत वकील ने तर्क दिया कि वे सिर्फ सपिण्ड विवाह का विरोध करते हैं। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5(5) में भी सपिण्ड विवाह की मनाही है। वकील ने कहा कि वे अंतर्धार्मिक एंव अंतर्जातीय विवाह के विरूद्ध नहीं है। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने उपर्युक्त तर्कों को खरिज करते हुए कहा कि जो भी कार्यवाही होगी वह कानून के तहत होगी । खापों को कोई अधिकार नहीं है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने वयस्क युगलों को समुचित सुरक्षा मुहैया कराने के सम्बंध में सरकार एवं अन्य पक्षों से सुझाव भी माँगे हैं।
  • सबसे बढ़कर न्यायालय ने इस फैसले के दौरान अपने पूर्व निर्णय का उदाहरण भी दिया । न्यायालय ने नीतीश कटारा के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि दो वयस्क सहमति से शादी करते हैं तो बात यहीं समाप्त हो जाती है।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय सामाजिक प्रगतिशीलता का प्रतीक है। इससे वयस्क युगलों को अपने संवैधानिक अधिकारों की प्राप्ति में मदद मिलेगी । सबसे बढ़कर इससे ऑनर किलिंग तथा खाप पंचायतों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

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