हाल ही में मालद्वीव में आपातकाल की घोषणा की गयी है। आपातकाल की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने कहा कि तख्तापलट की घटना को रोकने के लिए आपातकाल लगाया गया है। अब्दुल्ला यामीन के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश राजनीतिक बंदियों से मिलकर उनकी सरकार को अपदस्थ करना चाहते थे।
मालद्वीव में लगाये गये आपातकाल के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारणः
- वर्ष 2012 में मालद्वीव के प्रथम निर्वाचित राष्ट्रपति मुहम्मद नशीद को अपदस्थ कर दिया गया था। इस घटना के बाद से ही मालद्वीव लगातार राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है।
- हाल में यह संकट उस समय और गहरा हो गया जब मालद्वीव के सुप्रीम कोर्ट ने नौ राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का आदेश सुनाया ।
- मालद्वीव के सुप्रीम कोर्ट ने इन नौ राजनीतिक बंदियों के विरूद्ध दर्ज मामलों को भी गलत बताया तथा कहा कि सारे मामले राजनीति से प्रेरित थे।
- इन नौ राजनीतिक बंदियों में मालद्वीव के प्रथम निर्वाचित राष्ट्रपति मुहम्मद नशीद भी शामिल थे।
- जब मालद्वीव की वर्तमान सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को मानने से इन्कार कर दिया तो देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये।
- इन विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए मालद्वीव की सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी।
मालद्वीव का आपातकाल भारत के लिए चिंता का विषय क्यों है ?
- मालद्वीव की स्थिति भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है। मालद्वीव में तकरीवन 22 हजार भारतीय रहते हैं। इनकी सुरक्षा एवं हितों की रक्षा भारत की प्राथमिकता है।
- मालद्वीव हिंद महासागर में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। यहाँ उत्पन्न कोई भी समस्या हिंद महासागर की सुरक्षा के लिए चिंता उत्पन्न कर सकती है।
- मालद्वीव के साथ यद्यपि भारत के सम्बंध प्रगाढ़ रहे हैं किंतु हाल के समय में चीन मालद्वीव के साथ काफी नजदीकी बढ़ा रहा है।
- उदाहरण के तौर पर मालद्वीव ने भारत के स्थान पर चीन को प्राथमिकता देते हुए मुक्त व्यापार समझौते को सम्पन्न किया है।
- मालद्वीव के द्वारा कुल जितना बाहरी कर्ज लिया गया है उसका 70 प्रतिशत हिस्सा चीन से लिया गया है। यदि यह सिलासिला जारी रहा तो चीन के द्वारा मालद्वीव पर पूरा नियंत्रण किया जा सकता है।
- सबसे बढ़कर यदि चीन मालद्वीव में अपना सैन्य अड्डा स्थापित कर लेता है तो वह चारों ओर से भारत को घेर लेगा।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि मालद्वीव में आपातकाल लगाया जाना चिंता का विषय है। सबसे बढ़कर मालद्वीव की अशांति हिंद महासागर की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। मालद्वीव से ही होकर तकरीबन सभी प्रमुख जलीय व्यापारिक मार्ग गुजरते हैं।