इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेन्स यूनिट के वार्षिक वैश्विक डेमोक्रेसी सूचकांक के विषय में आप क्या जानते हैं? इस सूचकांक में भारत की स्थिति के बारे में टिप्पणी कीजिए। साथ ही बताइए किन कारणों से इस सूचकांक में भारत की स्थिति में गिरावट आयी है ?

इकोनॉमिस्ट इंटेलीजेंस यूनिट के द्वारा प्रतिवर्ष वैश्विक डेमोक्रेसी सूचकांक जारी किया जाता है। इसमें देशों को लोकतांत्रिक पैमानों पर आकलित कर रैंकिंग प्रदान की जाती है। वर्ष 2017 की रैकिंग में कुल 167 देशों को शामिल किया गया। इन 167 देशों में नार्वे को प्रथम स्थान तथा उत्तर कोरिया को अंतिम स्थान प्रदान किया गया।

इस सूचकांक को तैयार करने में पाँच श्रेणियों  का प्रयोग किया जाता है। इन पाँच श्रेणियों में निर्वाचक प्रक्रिया और बहुलतावाद, नागरिक स्वतंत्रता, सरकार का संचालन, राजनीतिक भागीदारी तथा राजनीतिक संस्कृति को शामिल किया जाता है। 60 सूचको के आधार पर विभिन्न देशों को लोकतंत्र की चार श्रेणियों में से एक में शामिल किया जाता है। इन चार श्रेणियों में पूर्ण लोकतंत्र, त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र, संकर शासन (Hybride Regime) एवं सत्तावादी लोकतंत्र को शामिल किया जाता है।

इस सूचकांक में भारत की स्थितिः

  • इस सूचकांक में भारत की स्थिति में गिराव
  • इस सूचकांक में भारत की स्थिति में गिरावट दर्ज की गयी है। भारत को 42 वीं रैंक प्रदान की गयी है जबकि पिछले वर्ष भारत को इस सूचकांक में 32 वीं रैंक प्राप्त हुयी थी।
  • सूचकांक में भारत को त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र की श्रेणी में रखा गया है।
  • इससे सबित होता है कि भारत में लोकतांत्रिक प्रणाली लगातार कमजोर हो रही है। ज्ञातव्य है कि भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का दर्जा प्रदान किया जाता है।

इस सूचकांक में भारत की स्थिति में गिरावट के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारणः

  • हाल के समय में भारत में सहिष्णुता में कमी आयी है। गौ संरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर एक विशेष वर्ग को निशाना बनाना जा रहा है तथा साम्प्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
  • मीडिया तथा मीडियाकर्मियों पर प्रहार किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर हाल ही में जर्नलिस्ट गौरी लंकेश की हत्या कर दी गयी। गौरी लंकेश हिंदू अतिवादियों की आलोचना के लिए जानी जाती थी।
  • अफस्पा (AFSPA) जैसे कानून अभी भी जारी हैं। इसके तहत मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जाता है जिस पर सर्वोच्च न्यायालय भी सख्त रूख अख्तियार कर चुका है।
  • दलितों के विरूद्ध किये जाने वाले अपराधों में वृद्धि हुयी है। गुजरात के ऊना में दलित उत्पीड़न की घटना राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रही थी।
  • सबसे बढ़कर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी काफी निम्न स्तर पर बनी हुयी है। इनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए समुचित प्रयास नहीं किये जा रहे है।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि डेमोक्रेसी सूचकांक विश्व के विभिन्न देशों में लोकतंत्र की स्थिति का उल्लेख करता है। इस सूचकांक में भारत की स्थिति में पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक गिरावट दर्ज की गयी है जो लोकतांत्रिक प्रणाली की कमजोरी को उद्घाटित करती है।
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