हाल ही में भारत को वासेनार अरेंजमेंट में शामिल किया गया है। वासेनार अरेंजमेंट के विषय में आप क्या जानते हैं, सविस्तार स्पष्ट कीजिए ? भारत को वासेनार अरेंजमेंट में शामिल करने से किस प्रकार के लाभ प्राप्त होंगे ?

वासेनार अरेंजमेंट 42 सदस्यीय समूह है जो चार अंतर्राष्ट्रिय निर्यात नियंत्रण समूहों में से एक है। ज्ञातव्य है कि न्यूक्लिर सप्लायर ग्रुप (NSG) एमटीसीआर (MTCR), ऑस्ट्रेलिया समूह तथा वासेनार अरेंजमेंट चार अंतर्राष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण समूह हैं।

वासेनार अरेंजमेंट परम्परागत हथियारों के हस्तांतरण और दोहरे प्रयोग वाली (Dual Use) वस्तुओं के निर्यात पर नियंत्रण रखता है ताकि इनके सम्बंध में एक जिम्मेदार एवं पारदर्शिता पूर्ण व्यवस्था स्थापित की जा सके। दोहरे प्रयोग वाली वस्तुओं से तात्पर्य ऐसी सामग्री से है जिनका प्रयोग सिविल के साथ-साथ नाभिकीय उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है।

हाल ही में भारत को वासेनार अरेंजमेंट का  सदस्य बनाया गया है। ज्ञातव्य है कि भारत को एमटीसीआर (Missile Technology Control Regime) एवं ऑस्ट्रेलियन ग्रुप का पहले ही सदस्य बनाया जा चुका है। भारत को सिर्फ एनएसजी (NSG) की सदस्यता प्राप्त करनी है।

वासेनार समूह में भारत की सदस्यता से भारत को प्राप्त होने वाले लाभः

  • वासेनार समूह में भारत को सदस्यता प्रदान किये जाने से वैश्विक स्तर पर एक जिम्मेदार परमाणु राष्ट्र के रूप में भारत की विश्वसनीयता स्थापित हुयी है। ज्ञातव्य है कि भारत को एनपीटी (NPT) एवं सीटीबीटी (CTBT) पर हस्ताक्षर किये बिना ही इस समूह की सदस्यता प्रदान की गयी है।
  • इससे भारत दुनिया के अन्य देशों के साथ सिविल नाभिकीय समझौते कर सकेगा तथा नाभिकीय ऊर्जा के लिए कच्चे माल प्राप्त कर सकेगा।
  • भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हो सकेगा जिससे भारत को अति उन्नत तकनीकी एवं कच्चे माल के आयात निर्यात में मदद मिलेगी।
  • अंतरिक्ष प्रौथोगिकी तथा रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा तथा मेक इन इण्डिया के अंतर्गत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकेगा।
  • भारत अन्य देशों से अति उन्नत तकनीकी प्राप्त कर सकेगा जिससे उसे साइबर सुरक्षा के मामले में स्वयं को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।
  • वासेनार समूह के साथ-साथ एमटीसीआर तथा आस्ट्रेलिया समूह की सदस्यता भारत को चीन के ऊपर कूटनीतिक बढ़त दिलाती है क्योंकि चीन को इन तीनों समूहों की सदस्यता नहीं प्राप्त है।
  • सबसे बढ़कर इन उपर्युक्त तीनो समूहों की सदस्यता से भारत की वैश्विक साख बढ़ी है जिससे एनएसजी तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए उसका दावा मजबूत हुआ है।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि वासेनार समूह की सदस्यता से भारत की वैश्विक साख बढ़ी है। साथ ही इससे भारत को चीन के ऊपर कूटनीतिक बढ़त भी हासिल हुयी है। सबसे बढ़कर एनएसजी तथा सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत का दावा मजबूत हुआ है।

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