मनी लाँड्रिंग (Money Laundering) के तहत अवैध स्रोतों से अर्जित किये धन को वैध स्रोतों से अर्जित धन के रूप में परिवर्तित किया जाता है। मनी लाँड्रिंग अथवा धन शोधन के पीछे भ्रष्टाचार का एक पूरा तंत्र काम करता है।
हाल ही में केन्द्र सरकार के द्वारा मनी लाँड्रिंग पर नियंत्रण स्थापित करने हेतु मनी लाँड्रिंग रोकथाम अधिनियम , 2002 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। ये संशोधन वित्त विधेयक, 2018 के माध्यम से प्रस्तुत किये गये हैं।
मनी लाँड्रिंग अधिनियम , 2002 में सरकार के द्वारा प्रस्तावित संशोधन :
- प्रस्तावित संशोधनों में प्रवर्तन निदेशालय को अधिक शक्ति प्रदान करने का प्रावधान किया गया है ताकि धन शोधन से सम्बंधी मामलों में प्रवर्तन निदेशालय प्रभावी कार्यवाही कर सके।
- प्रस्तावित संशोंधनों के लागू होने के बाद विदेशों में बनायी गयी सम्पत्ति पर भी सरकार के द्वारा कार्यवाही की जा सकेगी।
- सरकार के द्वारा कारपोरेट धेखाधड़ी को भी प्रस्तावित संशोधनों में शामिल किया गया है।
- धन शोधन से सम्बंधित मामलों में जाँच की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए समुचित प्रावधान किये गये हैं।
- मनी लाँड्रिंग रोंकथाम अधिनियम से सम्बंधित सभी मामलों में जमानत के सम्बंध में एकरूपता लाने का प्रावधान किया गया है।
कालेधन को नियंत्रित करने के लिए सरकार के द्वारा उठाये गये कदमः
- सरकार के द्वारा काले धन को नियंत्रित करने के लिए सख्त जुर्माने के साथ एक नवीन काला धन अधिनियम लागू किया गया है।
- सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एम.बी.शाह की अध्यक्षता में एक विशेष जाँच दल का गठन किया गया है।
- तकरीबन 1500 लोगों के विरूद्ध काले धन के सम्बंध में अभियोग की शुरूआत की गयी है।
- सबसे बढ़कर विमुद्रीकरण का ऐतिहासिक फैसला लिया गया जिसके द्वारा एक हजार एवं पाँच सौ रूपये के नोंटों में एकत्रित कालेधन को बाहर लाने में मदद मिली।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि केन्द्र सरकार धन शोधन एवं काले धन को लेकर काफी गंभीर है। धन शोधन के सम्बंध में उपर्युक्त प्रस्तावित संशोधनों को लागू करने से निश्चित तौर पर मनी लाँड्रिंग की समस्या से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है।