ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने फरवरी 2010 में भारत की तीन दिवसीय यात्रा की। इस दौरान दोनो देशों के मध्य क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों के साथ द्विपक्षीय महत्व के कई महत्वपूर्ण मसलों पर बातचीत हुयी। सबसे बढ़कर इस दौरान दोनो देशों ने विगत समझौतों की प्रगति का मूल्यांकन किया।
ईरान पश्चिम एशिया का महत्वपूर्ण राष्ट्र है। भारत एवं ईरान के बीच ऐतिहासिक काल से ही सशक्त एवं मित्रतापूर्ण सम्बंध रहे हैं। सबसे बढ़कर ईरान ऊर्जा संसाधनों के मामले में सम्पन्न है और सामरिक रूप से भी महत्वपूर्ण स्थान में स्थित है जिसके कारण भारत के लिए यह काफी अहम हो जाता है।
ईरान का भारत के लिए आर्थिक महत्व ?
- ईरान एवं भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2016-17 में भारत और ईरान के मध्य 12.89 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ।
- ईरान तेल एवं गैस के मामले में काफी सम्पन्न है जबकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इस लिहाज से ईरान भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका अदा कर सकता है।
- ईरान में मध्यमवर्गीय आबादी बढ़ रही है जिसके कारण ईरान में भारतीय उत्पादों के लिए बाजार के अवसर उतपन्न हो रहे हैं।
ईरान का भारत के लिए सामरिक महत्व ?
- ईरान भू-रणनीतिक रूप से सामरिक स्थान पर स्थित है। ईरान के माध्यम से भारत मध्य एशिया तथा अफगानिस्तान में आसानी से पहुँच सकता है।
- भारत ईरान में चाबहार बंदरगाह का विकास कर रहा है। इसके माध्यम से हाल ही में अफगानिस्तान को गेहूँ की खेप भेजी गयी है।
- चाबहार बंदरगाह पर स्थापित होकर भारत चीन के ऊपर रणनीतिक बढ़त हासिल कर सकता है। ज्ञातव्य है कि चीन पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में स्थापित हो चुका है। चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के काफी नजदीक है।
ईरान के साथ सम्बंधों की स्थापना में भारत के द्वारा बरती जाने वाली सावधनियाँ :
- ईरान के साथ सम्बंधों को मजबूती प्रदान करते समय भारत को ध्यान रखना होगा कि इससे अमेरिका नाराज न हो। ज्ञातव्य है कि अमेरिका ईरान के प्रति संदेहास्पद रूख रखता है।
- यमन के संघर्ष में ईरान हाऊथी विद्रोहियों का समर्थन कर रहा है जबकि सउदी अरब हाऊथी विद्रोहियों के विरूद्ध कदम उठा रहा है। इस प्रकार ईरान के साथ भारत की नजदीकी सउदी अरब को नाराज कर सकती है।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ईरान का भारत के लिए सामरिक एवं आर्थिक महत्व है अतः भारत को ईरान के साथ सम्बंधों को मजबूत बनाने का प्रयास करना चाहिए। किंतु इस सम्बंध में भारत को उपर्युक्त चुनौतियों का भी ध्यान रखना होगा।