सशक्त लोकतंत्र बहुत हद तक उस व्यवस्था पर निर्भर करता है जिसके माध्यम से जनप्रतिनिधियों को चुना जाता है। यदि सही एवं ईमानदार जनप्रतिनिधि चुने जायेंगे तो निश्चित तौर पर वे लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे तथा नीतियों को जनोन्मुख बनाने का प्रयास करेंगे।
सर्वाच्च न्यायालय के द्वारा राजनीति को स्वच्छ बनाने और भ्रष्टाचार से मुक्त रखने के लिए चुनाव सुधारों पर कई दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। हाल ही में इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
चुनाव सुधार के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का हालिया निर्णय
- सर्वोच्च न्यायालय ने अपने हालिया निर्णय में कहा है कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को नामांकन भरते समय हलफनामे में स्वयं के साथ-साथ अपने जीवनसाथी और निकटता से जुड़े लोगों की संपत्ति को सार्वजनिक करना होगा।
- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता स्वस्थ लोकतंत्र का मूल है। न्यायालय ने निर्देश दिया कि नियम चार एवं फॉर्म 26 में संशोधन करके उम्मीदवार, उसके जीवन साथी और उम्मीदवार के आश्रितों की संपत्ति को सामने लाने की व्यवस्था की जाये।
- साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सांसदों, विधायकों और उनके सहयोगियों की संपत्ति की लगातार निगरानी के लिए केंद्र सरकार के द्वारा एक स्थायी तंत्र भी निर्मित किया जाना चाहिए।
- यदि जांच में संपत्ति के अचानक बढ़ने के संकेत प्राप्त होते हैं तो स्थायी तंत्र के द्वारा समुचित कार्यवाही की संस्तुति की जानी चाहिए।
- न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि जनप्रतिनिधि पर मामला चल रहा या विचाराधीन है तो इस संबंध में सारी जानकारी विधायिका के सामने रखी जानी चाहिए ताकि विधायिका विचार कर सके कि संबंधित सांसद या विधायक सदन का सदस्य बने रहने लायक है कि नहीं।
- सर्वोच्च न्यायालय ने यह जानकारी आम जनता के समक्ष भी सार्वजनिक किये जाने की बात कही ताकि उन जनप्रतिनिधियों के अगले चुनाव में भागीदारी के संबंध में मतदाता स्वयं निर्णय कर सकें।
- सबसे बढ़कर न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि संपत्ति एवं उसके स्रोत की जानकारी का रहस्योद्घाटन न करना जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 123(2) के तहत चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करना एवं भ्रष्ट आचरण माना जायेगा।
इस निर्णय से चुनावी व्यवस्था को मजबूत बनाने और भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों से बचने में किस प्रकार मदद मिलेगी?
- इस निर्णय से प्रत्याशियों के लिए अवैध स्रोतों से धन अर्पित कर उसे चुनाव में लगाना कठिन हो जायेगा।
- जनप्रतिनिधियों की संपत्ति के संबंध में स्थायी तंत्र के गठन से उनकी आय पर समुचित निगरानी रखी जा सकेगी जिससे वे गलत कदम उठाने से बचेंगे।
- इससे चुनावी व्यवस्था को भी मजबूती प्राप्त होगी क्योंकि चुनाव में भ्रष्ट तरीके से अर्जित धन को नहीं लगाया जा सकेगा।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि चुनाव सुधार के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का हालिया निर्णय बहुत महत्वपूर्ण है। इससे चुनावी व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों से बचने में मदद प्राप्त होगी।