अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शरणार्थियों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, स्पष्ट कीजिए। क्या भारत को शरणार्थियों के लिए अपने दरवाजे खोल देने चाहिए? शरणार्थियों को शरण देते समय किन-किन प्रमुख तथ्यों पर गंभीरतापूर्वक ध्यान देने की जरूरत है?

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जारी गृह युद्धों एवं आपसी संघर्ष के कारण शरणार्थी समस्या गंभीर स्वरूप धारण करती जा रही है। सीरिया में पिछले 6 वर्षों से संघर्ष जारी है। इसी प्रकार ईराक में भी अशांति की स्थिति बनी हुयी है। सऊदी अरब एवं यमन के बीच संघर्ष जारी है जिससे पश्चिम एशियाई क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है।

सबसे बढ़कर स्वयं भारत के पड़ोस में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है। ज्ञातव्य है कि म्यांमार में संघर्ष करने के कारण भारी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी भारत में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे पूर्व लाखों की संख्या में बांग्लादेशी शरणार्थी भारत में प्रवेश कर चुके हैं जिसके कारण असम में स्थानीय जनता अल्पमत में आ चुकी है।

क्या भारत को शरणार्थियों के लिए अपने दरवाजे खोल देने चाहिए?

  • भारत ने हमेशा से विदेशियों को शरण प्रदान की है। सहिष्णुता एवं विश्व बंधुत्व भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण गुण रहे हैं। इस कारण से भारत को शरणार्थियों को शरण प्रदान करनी चाहिए।
  • वैश्विक स्तर पर भारत एक उभरती हुई शक्ति है। यदि भारत के द्वारा बेघर शरणार्थियों को स्थान दिया जाना है तो इससे भारत की छवि एक उदार आश्रयदाता के रूप में स्थापित होगी।
  • सबसे बढ़कर इस कदम से दुनिया के अन्य देश सबक लेंगे तथा बेघर शरणार्थियों के प्रति एक उदार रवैया अपनायेंगे।
  • इस कदम से भारत की एक लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में पहचान को मजबूती मिलेगी।

शरणार्थियों को शरण देते समय किन-किन महत्वपूर्ण तथ्यों पर ध्यान देने की जरूरत है?

  • चूंकि भारत संयुक्त राष्ट्र संघ के शरणार्थी कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है अतः शरणार्थियों को शरण देने के लिए भारत के ऊपर कोई कानूनी या वैधानिक दबाव नहीं है।
  • शरणार्थियों को शरण प्रदान करते समय देश की जनसांख्यिकी पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है। ज्ञातव्य है कि देश में बेरोजगारी चरम पर है।
  • शरणार्थियों को शरण देने से स्थानीय जनता के साथ उनके संघर्ष को बढ़ावा मिल सकता है। असम में बांग्लादेशी शरणार्थियों के कारण ही समस्या उत्पन्न हुई थी।
  • शरणार्थियों के आगमन से साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगड़ सकता है तथा दंगों आदि को बढ़ावा मिल सकता है।
  • शरणार्थियों की आड़ में कुछ आतंकी एवं समाजविरोधी गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति भी देश की सीमा में प्रवेश कर सकते हैं।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि शरणार्थियों को शरण देना भारत की संस्कृति का मूल तत्व रहा है। किंतु वर्तमान में हमें उपर्युक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ही किसी निर्णय तक पहुंचना होगा अन्यथा समस्या बढ़ सकती है।

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