भारतीय बागवानी अनुसंधान केन्द्र के द्वारा हाल ही में ऐसा पर्यावरण मित्र एवं किसान हितैषी कीट विकसित किया गया है जिसका इस्तेमाल पौधें एंव सब्जियों को हानिकारक कीटों के प्रभाव से बचाने में किया जा सकेगा। इस कीट को रासायनिक की अनाशकों के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
ज्ञातव्य है कि किसान अपनी फसलों को हानिकारक कीटों के प्रभाव से बचाने के लिए रासायनिक कीटनाशक प्रयुक्त करते हैं। किंतु ये रासायनिक कीटनाशक फलों एवं सब्जियों के माध्यम से मानव शरीर में पहुँचकर उन्हे गंभीर हानि पहुँचाते हैं। इस प्रकार नव विकसित पर्यावरण हितैषी कीट फसलों के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए भी लाभदायक होंगे।
भारतीय बागवानी अनुसंधान केन्द्र के द्वारा विकसित कीट किस प्रकार कार्य करेगा ?
- भारतीय बागवानी अनुसंधान केन्द्र के द्वारा नव विकसित कीट का नाम ट्राइको ग्रेसा काइलोनिश है।
- ट्राइको ग्रेसा काइलोनिश फलों एंव सब्जियों को हानि पहुँचाने वाले कीटों को खा जाता है अर्थात् उन्हे समाप्त कर देता है।
- ट्राइको ग्रेसा काइलोनिश नामक इस कीट को पेपर कार्ड के माध्यम से एक लकड़ी पर छोड़ दिया जाता है। यह कीट लकड़ी पर अंडे देता है जिससे अनेक कीट निकलते हैं।
- ये कीट पौधे के विभिन्न अगों पर फैल जाते हैं और हानिकारक कीड़ों का खात्मा शुरू कर देते हैं।
- इन कीटों के प्रभाव से खेत में फल एवं तना छेदक का प्रभाव नहीं रहता है।
- सबसे बढ़कर इस नव विकसित कीट का सफल प्रयोग किया जा चुका है। हाल ही में बिहार के बांका जिले में कृषि विज्ञान केन्द्र ने बैंगन के पौधें पर इसका सफल प्रयोग किया है।
यह नव विकसित कीट किसानों को किस प्रकार से लाभान्वित करेगा।
- इस कीट की मदद से किसान बिना रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग किए ही हानिकारक कीटों का खात्मा कर सकेंगे।
- रासायनिक कीटनाशकों की खरीद में व्यय किया जाने वाला धन भी बचेगा जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
- इससे न सिर्फ खेती की लागत घटेगी बल्कि पृथ्वी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। ज्ञातव्य है कि कीटनाशकों पर प्रति हेक्टेयर तकरीबन 40-50 हजार रूपये खर्च करने पड़ते हैं।
- सबसे बढ़कर इससे जैविक कृषि को प्रोत्साहन मिलेगा एवं पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य को भी लाभ होगा।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भारतीय बागवानी अनुसंधान केन्द्र के द्वारा विकसित पर्यावरण मित्र कीट किसानों के लिए अनेक प्रकार से लाभकारी होगा। सबसे बढ़कर यह मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए भी लाभकारी साबित होगा।