देश के सरकारी बैंक पहले से ही गैर निष्पादित पूँजी की समस्या का सामना कर रहे हैं। हाल ही में यह समस्या उस समय और गंभीर हो गयी जब देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला सामने आया। यह घोटाला पंजाब नेशनल बैंक की मुम्बई शाखा में 1.77 अरब डॉलर या तकरीबन 12 हजार करोड़ रूपये का है।
इस घोटाले की सूचना स्वयं पंजाब नेशनल बैंक की और से शेयर बाजार में दी गयी। बैंक ने बताया कि उसकी मुंबई की शाखा में कुछ गड़बड़ी दर्ज की गयी है। कुछ खाताधारकों को लाभ पहुँचाने के लिए लेन देन किया गया। इन लेन देनों के आधार पर ग्राहकों को दूसरे बैंको ने विदेशों में कर्ज दिए हैं।
देश के इस सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारणः
- इस घेटाले के लिए उत्तरदायी सबसे बड़ा कारण पंजाब नेशनल बैंक के द्वारा जारी किये गये एलओयू (LOU-Letter of Undertakings) हैं।
- एलओयू एक बैंक की शाखा की ओर से दूसरे बैंक की शाखा को जारी किया गया ऐसा प्रपत्र है जो निश्चित खाताधारकों के पक्ष में दी गयी एक गारंटी होती है। इस गांरटी के आधार पर दूसरे जगह की बैंक शाखा उस ग्राहक को कर्ज की सुविधा प्रदान करती है।
- आभूषण कारोबारी नीरव मोदी एवं अन्य ग्राहकों ने पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई शाखा से एलओयू प्राप्त किये तथा इन एलओयू के आधार पर दूसरे देशों में कर्ज प्राप्त किया।
- यह गोरखधंधा वर्ष 2010 से ही चल रहा था किंतु किसी को इसलिए पता नहीं चला क्योंकि ग्राहक अपना कर्ज समय पर चुका रहे थे।
- जब भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा इस सम्बंध में जवाब-तलब किया गया तो पीएनबी के समक्ष इसे सार्वजनिक करने के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं बचा।
इस प्रकार की समस्याओं से प्रभावी तरीके से निपटने के उपाय :
- बैंको के द्वारा केवाईसी (Know Your Customer) नियमों को सख्त बनाया जाना चाहिए ताकि प्रत्येक ग्राहक के सम्बंध में बैंकों के पास पर्याप्त जानकारी मौजूद रहे।
- बैंकिग क्षेत्र से सम्बंधित भ्रष्ट कर्मचारियों के लिए अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किये जाने चाहिए तथा मामालों का निपटारा निश्चित समय के भीतर किया जाना चाहिए।
- बैंकिंग भ्रष्टाचार के सम्बंध में प्रवर्तन निदेशालय को अधिक अधिकार एवं शक्तियाँ प्रदान की जानी चाहिए।
- इस तरह के मामलों का पता लगाने एवं भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोंकने के लिए एक बैंकिग इंटेलीजेंस यूनिट गठित की जानी चाहिए।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि देश में बैंकिंग तंत्र भ्रष्टाचार की ओर बढ़ रहा है। विमुद्रीकरण के बाद से यह भ्रष्टाचार अधिक गंभीर होता जा रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए उपर्युक्त उपायों पर शीघ्रातिशीघ्र अमल करने की आवश्यकता है।