हाइपरलूप एक ट्यूब ट्रांसपोर्ट तकनीकी है। हाइपरलूप के अंतर्गत एलीवेटेड खंभों के ऊपर एक ट्यूब बिछायी जाती है। इस ट्यूब के भीतर बुलेट के आकार की सिंगल बोगी हवा में तैरते हुए चलती है।
हाइपरलूप तकनीकी के अंतर्गत ट्यूब के भीतर सिंगल बोगी को चुंबकीय शक्ति से दौड़ाया जाता है। ज्ञातव्य है कि इस दौरान ट्यूब को निर्वात की स्थिति में रखा जाता है। बिजली के अतिरिक्त इसमें सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा का भी उपयोग किया जा सकता है। सबसे बढ़कर हाइपरलूप तकनीकी में बिजली की बहुत कम खपत होती है तथा प्रदूषण भी नाममात्र का होता है।
हाइपरलूप तकनीकी के संबंध में महाराष्ट्र सरकार एवं वर्जिन ग्रुप के बीच समझौता :
- महाराष्ट्र सरकार तथा वर्जिन ग्रुप के बीच हाइपरलूप तकनीकी के संबंध में 18 फरवरी 2018 को एक समझौता सम्पन्न हुआ।
- इस समझौते के तहत मुंबई एवं पुणे को हाइपरलूप तकनीकी के द्वारा आपस में जोड़ा जायेगा।
- ज्ञातव्य है कि हाइपरलूप तकनीकी टेस्ला के संस्थापक एलन मस्क के दिमाग की उपज है। एलन मस्क ने 2013 में इसे दुनिया के समक्ष रखा था।
हाइपरलूप परियोजना से होने वाले प्रमुख लाभ
मुंबई एवं पुणे के बीच की दूरी तकरीबन 150 किलोमीटर है। हाइपरलूप परिवहन के माध्यम से इस दूरी को मात्र 15 से 25 मिनट में तय किया जा सकेगा।
- इससे परिवहन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आयेगा तथा महाराष्ट्र राज्य वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर सकेगा।
- हाइपरलूप परियोजना से तकरीबन 55 अरब डॉलर के सामाजिक-आर्थिक लाभ का आकलन किया गया है। इससे रोजगार के हजारों अवसरों का सृजन भी होगा।
- हाइपरलूप रूट पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होगा तथा इसमें 1000 किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से दौड़ने की क्षमता होगी।
- मुंबई से पुणे के बीच स्थापित की जाने वाली इस हाइपरलूप परियोजना के माध्यम से तकरीबन 15-20 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष यात्रा कर पायेंगे।
- सबसे बढ़कर यह पर्यावरण हितैषी परिवहन माध्यम है क्योंकि इससे बहुत कम मात्रा में ही प्रदूषण फैलता है।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि हाइपरलूप एक अत्याधुनिक परिवहन प्रणाली है। यह बुलेट ट्रेन के मुकाबले तीन गुनी अधिक गति से चल सकती है। इससे निश्चित तौर पर देश में परिवहन मामले में क्रांति आ सकेगी।